दिल्ली के बीकानेर हाउस में सेंसरशिप का विवाद: रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी से 70 तस्वीरें हटाई गईं, प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा
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दिल्ली के प्रतिष्ठित बीकानेर हाउस में आयोजित कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी नो आइडिया इज फाइनल अचानक विवादों के घेरे में आ गई है। प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही प्रशासन ने वहां लगी 100 से अधिक तस्वीरों में से 70 से ज्यादा को हटाने का फरमान जारी कर दिया।

क्या है पूरा मामला? रेहान वाड्रा ने आरोप लगाया है कि उन्हें बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे धमकी दी गई कि यदि शाम 5 बजे तक तस्वीरें नहीं हटाई गईं, तो पूरी प्रदर्शनी रद्द कर दी जाएगी। रेहान के अनुसार, प्रशासन ने इसके पीछे मौजूदा राजनीतिक माहौल का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से कलाकारों की अभिव्यक्ति पर सेंसरशिप है।

तस्वीरों में क्या था? हटाए गए चित्रों में हाल ही में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें शामिल थीं। इन तस्वीरों में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और विरोध के दौरान का तनावपूर्ण माहौल कैद था। एक तस्वीर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी प्रदर्शनकारियों के बीच दिखाई दे रहे थे। रेहान का कहना है कि ये तस्वीरें केवल पिछले छह महीनों की घटनाओं का दस्तावेजीकरण थीं, न कि कोई राजनीतिक एजेंडा।

प्रियंका गांधी का तीखा प्रहार बेटे की प्रदर्शनी में हुई इस काट-छांट पर प्रियंका गांधी भड़क उठीं। उन्होंने प्रशासन के रुख को हास्यास्पद करार देते हुए कहा, वे देशभर के युवाओं की आवाज दबा रहे हैं। यह वही तरीका है जिससे वे लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं। प्रियंका ने जोर दिया कि इन तस्वीरों में कुछ भी अपमानजनक नहीं था, बल्कि यह एक कलाकार का नजरिया था। उन्होंने कहा, आज यह रेहान के साथ हुआ है, कल यह किसी और कलाकार के साथ होगा।

तिरंगे की फोटो पर भी आपत्ति? रेहान ने बताया कि प्रशासन ने तिरंगे की तस्वीरों को हटाने तक का दबाव बनाया, जिसे उन्होंने मानने से इनकार कर दिया। रेहान के मुताबिक, प्रदर्शनी का लेआउट और विषय पहले ही प्रबंधन के साथ साझा किया जा चुका था। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे झुकेंगे नहीं और प्रदर्शनी रविवार तक जारी रहेगी।

प्रशासन की चुप्पी इस पूरे घटनाक्रम पर बीकानेर हाउस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब चुनाव आयोग के फैसलों और कार्यप्रणाली को लेकर पहले से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। अब देखना यह है कि क्या यह मामला केवल एक प्रदर्शनी तक सीमित रहेगा या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक बड़ी बहस को जन्म देगा।

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