फैक्ट चेक: क्या सपा नेता राजकुमार भाटी ने हिंदू धर्म त्याग दिया? वायरल वीडियो की सच्चाई जानें
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। इस बीच, समाजवादी पार्टी के नेता राजकुमार भाटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में भाटी को कुछ अन्य लोगों के साथ शपथ लेते देखा जा सकता है, जिसके बाद दावा किया जा रहा है कि उन्होंने हिंदू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपना लिया है।

क्या है वायरल वीडियो में? वीडियो में राजकुमार भाटी माइक के सामने खड़े होकर कुछ लाइनों को दोहराते हुए प्रण ले रहे हैं। इन लाइनों में हिंदू देवी-देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम और कृष्ण) को न पूजने और उन्हें भगवान न मानने की बात कही गई है। इस वीडियो को शेयर करते हुए बीजेपी समर्थकों ने सपा पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया है और अखिलेश यादव से इस पर सफाई मांगी है।

बीजेपी का तीखा हमला बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स से इस वीडियो को शेयर करते हुए पूछा गया है कि क्या यही सपा की असली सोच है? पार्टी ने इसे चुनाव के समय हिंदू बनने का नाटक करार दिया है और आरोप लगाया है कि सपा का दोहरा चरित्र अब सामने आ चुका है। सोशल मीडिया पर भी यूजर्स भाटी के इस कदम को लेकर दो गुटों में बंट गए हैं।

खुद राजकुमार भाटी ने बताई सच्चाई मामला तूल पकड़ता देख राजकुमार भाटी ने सोशल मीडिया पर अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 20 अक्टूबर को दिल्ली के अंबेडकर भवन में भारतीय बौद्ध महासभा के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। भाटी ने कहा, एक सच्चा समाजवादी होने के नाते मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं। जैसे मैं गुरुद्वारे या मजलिस में जाता हूं, वैसे ही बौद्ध कार्यक्रम में भी शामिल हुआ।

धर्म परिवर्तन के दावों को नकारा भाटी ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि बौद्ध धर्म और गौतम बुद्ध की शिक्षाओं के प्रति उनका सम्मान है, लेकिन उन्होंने धर्म परिवर्तन नहीं किया है। उन्होंने इसे बीजेपी आईटी सेल का दुष्प्रचार बताते हुए कहा, मुझे धर्म परिवर्तन की न तो कोई आवश्यकता है और न ही मेरा ऐसा कोई इरादा है। मानवता की सेवा किसी भी धर्म में रहकर की जा सकती है।

विवादों से पुराना नाता यह पहली बार नहीं है जब राजकुमार भाटी विवादों में घिरे हैं। मई 2026 में ब्राह्मणों पर की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था। उस समय पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें फटकार लगाते हुए नेताओं को संभलकर बयान देने की हिदायत दी थी। अब इस नए घटनाक्रम ने एक बार फिर से सपा को राजनीतिक घेरे में खड़ा कर दिया है।

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