परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: सीबीआई ने संभाली कमान, पंजाब सरकार ने अचानक क्यों बदला रुख?
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मनसा/चंडीगढ़: पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की नृशंस हत्या के मामले में जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथों में है। सीबीआई ने आधिकारिक तौर पर केस दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है। यह कदम मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा मामले को सीबीआई को सौंपने की घोषणा के तुरंत बाद उठाया गया।

गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा से पहले बड़ा फैसला

यह घटनाक्रम तब हुआ जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मानसा में पीड़ित परिवार से मिलने वाले थे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुबह 9:49 बजे घोषणा की कि परिवार की मांग और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए जांच सीबीआई को सौंपी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले ने सभी को चौंका दिया, क्योंकि आम आदमी पार्टी अक्सर सीबीआई पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाती रही है।

क्यों हो रही थी सीबीआई जांच की मांग?

मृतक झोटा के पिता और पूर्व सैनिक भीम सिंह ने शुरू से ही स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें पंजाब पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है। झोटा की हत्या के बाद बनी एक्शन कमिटी भी लगातार केंद्रीय जांच की मांग कर रही थी। सोमवार को जब तीन महिला आईएएस अधिकारियों की एक सरकारी कमिटी ने परिवार से मुलाकात की, तो उन्होंने अपनी मांग को और मजबूती से रखा। आखिरकार, सरकार को परिवार के दबाव के आगे झुकना पड़ा।

कौन थे परविंदर सिंह झोटा?

परविंदर सिंह झोटा पंजाब में नशे के खिलाफ एक मुखर आवाज थे। वे विशेष रूप से उन केमिस्टों के खिलाफ सक्रिय थे जो डॉक्टर की पर्ची के बिना नशीली दवाइयां बेचते थे। 13 अक्टूबर के दिन, जब वे ऐसी ही एक अवैध गतिविधियों का पर्दाफाश करने के लिए फेसबुक पर लाइव थे, तभी एक केमिस्ट ने उन्हें गोली मार दी। इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया था।

राजनीतिक गरमागरमी के बीच पुलिस की भूमिका पर सवाल

पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी पहले ही भाजपा के निशाने पर है। इस मामले में लापरवाही के चलते स्थानीय एसएचओ बेअंत कौर को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है। राज्य के कई हिस्सों में झोटा के समर्थकों ने बाजार बंद कराकर और टोल प्लाजा पर विरोध प्रदर्शन करके न्याय की गुहार लगाई थी।

आगे की कार्रवाई

अब सीबीआई पंजाब पुलिस से इस केस से जुड़े सभी रिकॉर्ड और सबूत अपने कब्जे में लेगी। केंद्रीय एजेंसी द्वारा नई एफआईआर दर्ज करने के साथ ही उम्मीद की जा रही है कि इस हत्याकांड के पीछे के बड़े रसूखदार चेहरों और नेक्सस का पर्दाफाश हो सकेगा। राज्य में कानून-व्यवस्था और नशाखोरी के मुद्दे पर यह केस आने वाले समय में विधानसभा चुनावों के लिए एक बड़ी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।

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