पेरिस में हिंसा का तांडव और सख्त हुई सरकार फ्रांस की इमैनुएल मैक्रों सरकार ने देश में जारी हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए अब प्रमुख शहरों में सेना की तैनाती की जाएगी। यह कदम 17 अक्टूबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं के बाद उठाया गया है।
शिक्षा व्यवस्था पर छात्रों का महा-आंदोलन फ्रांस में इन प्रदर्शनों की शुरुआत स्कूलों की खराब व्यवस्था और शिक्षकों की कमी के खिलाफ हुई थी। छात्र संगठनों ने शनिवार को एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है। पेरिस, मार्सिले और लियोन जैसे शहरों में स्थिति बिगड़ने के बाद सरकार पर भारी दबाव है। सरकार ने इसे हिंसा और गणराज्य के अस्तित्व के बीच की लड़ाई करार दिया है।
सरकार बनाम प्रदर्शनकारी: दावों का टकराव फ्रांसीसी प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने इन हिंसक प्रदर्शनों के लिए वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी संगठनों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह गुस्सा महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और सरकार की जनविरोधी नीतियों के प्रति है, जिसे सत्ता पक्ष नजरअंदाज कर रहा है।
क्या यूरोप में दोहराया जाएगा अरब स्प्रिंग ? फ्रांस ही नहीं, बल्कि इटली, स्पेन, बेल्जियम, पुर्तगाल और अल्बानिया समेत यूरोप के करीब नौ देशों में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कहीं महंगाई तो कहीं आवास की कीमतों ने जनता को सड़कों पर ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति 2010-11 के अरब स्प्रिंग की याद दिला रही है।
इतिहास से सबक: क्या सत्ता बदल देंगे प्रदर्शन? 2010 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब स्प्रिंग की लहर ने मिस्र, लीबिया और सीरिया जैसे देशों की नींव हिला दी थी। वहां भ्रष्टाचार और आर्थिक तंगी के चलते तानाशाहों को अपनी गद्दी गंवानी पड़ी थी। अब यूरोप में बढ़ती महंगाई और गिरती जनसेवाओं के खिलाफ उठ रही यह आवाज अगर नहीं थमी, तो कई यूरोपीय नेताओं की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है। फिलहाल, मैक्रों सरकार ने सेना उतारकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हाल में झुकने को तैयार नहीं है।
France erupts.
— Rajat Jain (@RajatJain) October 18, 2026
⁰Fuel prices, living costs, crumbling schools and a budget plan freezing benefits brought 550,000 onto the streets, by the government s own count.
From Paris to Dijon, the chant was Macron DEMISSION.
⁰Then came 1,200 arrests, 150 police hurt and Limoges … pic.twitter.com/h8zXJAj5Fg
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