लाल किले पर फहराएंगे भगवा: उद्धव ठाकरे की दहाड़ से गूंजा शिवाजी पार्क
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मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आयोजित विजयादशमी रैली में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए बड़ा राजनीतिक संकल्प लिया। उन्होंने ऐलान किया कि अब भगवा झंडा केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे दिल्ली के लाल किले पर भी फहराया जाना चाहिए।

क्रांति बहादुरों के लिए, शांति मुर्दों के लिए एकनाथ शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि चाहे कितने भी लुटेरे आ जाएं, वे हमारे भगवान और हमारी विरासत को नहीं चुरा सकते। ठाकरे ने बालासाहेब ठाकरे को याद करते हुए कहा, क्रांति हमेशा बहादुरों के लिए होती है, जबकि शांति तो मुर्दों के लिए होती है।

सूखे और मुआवजे पर सरकार को घेरा ठाकरे ने राज्य में व्याप्त सूखे की स्थिति को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार केवल खोखले वादे कर रही है। किसानों को मुआवजे के नाम पर मिलने वाले 5,000 रुपये पर तंज कसते हुए उन्होंने इसे किसानों का अपमान बताया। उन्होंने सवाल किया कि कर्जमाफी का लाभ वास्तव में कितने किसानों तक पहुँचा है, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

भाजपा पर बांटने की राजनीति का आरोप भाजपा पर हमला करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे तिरंगे के रंगों को बांट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सांसदों को तोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन किसानों की सुध लेने के लिए उनके पास मामूली रकम है। ठाकरे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भाजपा ने न तो हिंदुओं की सुरक्षा की और न ही देश को सही दिशा दी।

अभिजीत दीपके के समर्थन में खड़े उद्धव उद्धव ठाकरे ने अभिजीत दीपके का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा, मैं देश का पहला राजनेता हूँ जिसने अभिजीत दीपके के साथ खड़े होने का साहस किया और आज भी मैं उनके साथ हूँ। ठाकरे ने विश्वास जताया कि जब सत्ता बदलेगी, तो महाराष्ट्र देवी भवानी की तलवार की तरह फिर से चमकेगा।

टाइगर श्रॉफ और सुरक्षा व्यवस्था पर तंज हाल ही में टाइगर श्रॉफ की कार पर हुए हमले का जिक्र करते हुए ठाकरे ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कटाक्ष किया कि मुख्यमंत्री पब्लिसिटी के लिए दौड़कर उनसे मिलने तो पहुँच गए, लेकिन अपराधी हथियारों के साथ वहां तक कैसे पहुँचे? उन्होंने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क पर भी सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर देवेंद्र फडणवीस में हिम्मत है, तो उन्हें दिल्ली जाकर सीधे अपने आलाकमान से इस बारे में बात करनी चाहिए।

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