राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी भाषण ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। नागपुर में दिए अपने संबोधन में भागवत ने भारत को अस्थिर करने के लिए रचे जा रहे अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रों की ओर इशारा किया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे पर भागवत का पुरजोर समर्थन किया है।
रिजीम चेंज के जरिए कठपुतली सरकार की मंशा सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मोहन भागवत के भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा कि रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) का खेल पूरी दुनिया में चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी ताकतें अपनी कठपुतली सरकारें बिठाने के लिए दुनिया भर में उथल-पुथल मचा रही हैं। चौधरी के अनुसार, ये ताकते अब भारत को अपना निशाना बना रही हैं।
स्थानीय नेताओं की मिलीभगत का आरोप चौधरी ने आगे कहा कि विदेशी ताकतों को स्थानीय स्तर पर भी सहयोग मिल रहा है। उन्होंने सत्ता के भूखे और स्वार्थी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे लोग अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए देश, हिंदू समाज और संघ को कमजोर करने की साजिशों में शामिल हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ये डिस्मेंटलिंग यानी देश को तोड़ने का एक सुनियोजित प्रयास है।
भागवत ने बांग्लादेश और फ्रांस का किया जिक्र RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल की हालिया घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इन देशों में जो कुछ भी हुआ, वह बाहरी ताकतों की सोची-समझी करतूत है। भागवत ने चेताया कि ये ताकतें मानती हैं कि सत्ता बदलने से स्थितियां उनके अनुसार हो जाएंगी, जो कि एक बड़ा भ्रम है।
भारत की तरक्की ही सबसे बड़ी बाधा मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत की बढ़ती ताकत और मजबूत नेतृत्व विदेशी षड्यंत्रकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति उनकी राह का कांटा साबित हो रही है, इसीलिए वे देश के भीतर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्रप्रेम के आगे नाकाम होंगी साजिशें सम्राट चौधरी ने अपने समर्थन में यह भी जोड़ा कि भारत की दृढ़ नीतियां और युवाओं में बढ़ा राष्ट्रप्रेम ऐसी शक्तियों के एजेंडे को विफल करने में सक्षम है। फिलहाल, भागवत और चौधरी के इन बयानों ने विदेशी हस्तक्षेप और देश की आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
*दुनिया भर में रिजीम चेंज के नाम पर हो रही उथल-पुथल वास्तव में विदेशी ताकतों द्वारा अपनी कठपुतली सरकारें बिठाने और अपने स्वार्थ का पोषण करने का उपक्रम है।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) October 20, 2026
सत्ता के भूखे और स्वार्थी स्थानीय नेताओं की मिलीभगत से वे भारत, हिंदू समाज और संघ को कमजोर करने और तोड़ने (डिस्मेंटलिंग) के… pic.twitter.com/vH9JfyYoqe
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