एशियन पैरा गेम्स 2026: जन्म से आंखों के आगे अंधेरा, फिर भी नहीं मानी हार; हिमांशु नांदल ने तैराकी में रचा इतिहास
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एशियन पैरा गेम्स 2026 से भारत के लिए गर्व की खबर सामने आई है। हरियाणा के रोहतक के रहने वाले 22 वर्षीय पैरा तैराक हिमांशु नांदल ने अपनी मेहनत और जज्बे से देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 तैराकी स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है।

संघर्ष भरी शुरुआत और परिवार का साथ

हिमांशु का जन्म 25 मई 2004 को हुआ था। जन्म से ही ऑप्टिक नर्व में खराबी के कारण उन्हें दिखाई नहीं देता है। हालांकि, उनके परिवार ने उन्हें कभी अपनी कमजोरी का अहसास नहीं होने दिया। उनके पिता पूर्व राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी रहे हैं, जिनसे हिमांशु को खेल की प्रेरणा मिली।

पढ़ाई और खेल का अनूठा तालमेल

चार साल की उम्र में हिमांशु दिल्ली आ गए थे। उन्होंने नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (NAB) से ब्रेल लिपि सीखी और अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की। शिक्षा के साथ-साथ उनका खेलों के प्रति जुनून लगातार बढ़ता रहा।

जूडो से तैराकी तक का सफर

हिमांशु ने अपने खेल करियर की शुरुआत जूडो से की थी, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीते। लेकिन 2021 में उन्होंने पैरा तैराकी को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया। हिमांशु का मानना है कि तैराकी ने उन्हें एक नई पहचान दी और यह अहसास कराया कि वह किसी से कम नहीं हैं।

रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन का सिलसिला

हिमांशु की सफलता की कहानी 2022 से रफ्तार पकड़ी। उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीते और 100 मीटर फ्रीस्टाइल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद गुवाहाटी में उन्होंने तीन और स्वर्ण पदक जीतकर अपनी धाक जमाई। 2024 में वे पेरिस पैरालंपिक के लिए योग्यता हासिल करने वाले पहले दृष्टिहीन भारतीय तैराक बने।

एस11 श्रेणी और अंतरराष्ट्रीय पहचान

पैरा स्विमिंग में एस11 श्रेणी पूरी तरह दृष्टिहीन तैराकों के लिए आरक्षित होती है। 2023 में अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण मिलने के बाद हिमांशु ने वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 2026 एशियन पैरा गेम्स में 5:10.91 के समय के साथ कांस्य पदक जीतना उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अब तक का सबसे बड़ा मील का पत्थर है।

अब सबकी निगाहें 21 अक्टूबर को होने वाली 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 स्पर्धा पर टिकी हैं, जहां एक बार फिर हिमांशु देश को गौरवान्वित करने के लिए तैयार हैं।

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