राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भागवत ने दुनिया के कई देशों में चल रहे राजनीतिक अस्थिरता के दौर का हवाला देते हुए भारत को रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) की कथित साजिशों से आगाह किया है।
क्या कहा मोहन भागवत ने? नागपुर में अपने संबोधन में भागवत ने दावा किया कि भारत की बढ़ती प्रगति से कुछ बाहरी ताकतें घबराई हुई हैं और वे देश को तोड़ने के लिए रिजीम चेंज की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलनों के जरिए व्यवस्था बदलने की सोच गलत है और समस्याओं का समाधान समाज के भीतर से निकलना चाहिए। उन्होंने इसे पश्चिम से आ रहा एक ऐसा तूफान बताया जो देश की संस्कृति और सुरक्षा को नष्ट करना चाहता है।
विपक्षी दलों का तीखा हमला भागवत के इस बयान पर विपक्षी नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है। माकपा नेता वृंदा करात ने कहा कि भारत कोई आरएसएस की शाखा नहीं है, जहां सब कुछ संघ प्रमुख के इशारे पर हो। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत विरोध करना और सत्ता बदलने की मांग करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।
राजद सांसद मनोज झा ने इसे गांधी के देश की मर्यादा बताया और कहा कि निरंकुश सत्ता को चुनौती देना लोकतंत्र की पहचान है। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा कि भागवत खुद भी मोदी-शाह सरकार से मुक्ति चाहते हैं और उनके मन की बात ही विपक्ष कह रहा है।
सरकार और समर्थकों का बचाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भागवत के संबोधन को प्रेरणादायक बताते हुए राष्ट्रीय एकता और आत्मनिर्भरता पर उनके जोर का स्वागत किया। एनडीए के घटक दलों ने भी इस बयान का समर्थन किया है। उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद और शिवसेना (शिंदे गुट) के आनंद दुबे ने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध और अराजकता में अंतर होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत को बांग्लादेश या नेपाल जैसे अस्थिर देशों की श्रेणी में धकेलना चाहती हैं।
विवाद की जड़ क्या है? यह पूरा विवाद वकील प्रशांत भूषण के उस हालिया बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान रिजीम चेंज की बात कही थी। भाजपा ने इस बयान को आधार बनाकर विपक्ष पर देश में अस्थिरता फैलाने और युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई भाजपा नेताओं ने विपक्षी दलों पर अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
फिलहाल, इस बयान ने देश के भीतर जारी राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर दिया है। जहाँ एक पक्ष इसे राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे लोकतंत्र को बचाने की संवैधानिक लड़ाई करार दे रहा है।
*VIDEO | Delhi: On Mohan Bhagwat’s remarks over ‘Regime Change’, CPI(M) leader Brinda Karat says, “Bhagwat ji should understand this. Please understand, Bhagwat ji, India is not an RSS shakha where everything is dictated by your words, which are unconstitutional. This is India.… pic.twitter.com/07kkemxcLJ
— Press Trust of India (@PTI_News) October 20, 2026
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