फ्रांस इन दिनों गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है। बढ़ती महंगाई और बदहाल स्कूली बुनियादी ढांचे के खिलाफ शुरू हुआ जन-आक्रोश अब हिंसक हो चुका है। पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों की सड़कें युद्ध के मैदान में तब्दील हो गई हैं।
देश को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की तीखी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध और लूटपाट करने वाले अपराधियों के बीच सरकार फर्क करना जानती है। मैक्रों ने चेतावनी दी कि जिन लोगों ने हिंसा की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें इसकी भरपाई करनी होगी। सरकार ऐसे चरमपंथी गुटों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरतेगी।
फ्रांस पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 2400 से अधिक उपद्रवियों को हिरासत में लिया है। पेरिस के रिपब्लिक स्क्वायर के पास स्थिति सबसे अधिक विस्फोटक रही, जहां प्रदर्शनकारियों ने दुकानों के शीशे तोड़े और लूटपाट की। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले और स्टन ग्रेनेड का सहारा लेना पड़ा। ल्योन जैसे शहरों में भी लग्जरी दुकानों को निशाना बनाया गया है।
यह प्रदर्शन ऐसे नाजुक समय में हुए हैं जब फ्रांस राष्ट्रपति चुनाव की दहलीज पर खड़ा है। मैक्रों के कार्यकाल का यह अंतिम चरण है और बढ़ती महंगाई ने उनकी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष, विशेषकर मरीन ली पेन, इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश में है। ली पेन का दावा है कि यह हिंसा मैक्रों सरकार के विफल प्रशासन का परिणाम है।
फ्रांस की हिंसा पर अंतरराष्ट्रीय जगत की भी नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर आप्रवासन (इमिग्रेशन) नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी में कहा कि नफरत से भरे लोगों ने एक महान देश को बर्बाद कर दिया है। ट्रंप ने फ्रांस को अपनी सीमाएं सुरक्षित करने की भी सलाह दी है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा सकता है। फिलहाल देश में आपातकाल जैसे हालात नहीं हैं, लेकिन सड़कों पर पसरा सन्नाटा और बिखरे हुए कांच के टुकड़े इस बात का संकेत हैं कि फ्रांस में सामाजिक असंतोष का ज्वालामुखी कभी भी फिर से फट सकता है।
Ceux qui ont cherché à faire tomber la République auront à en répondre. pic.twitter.com/qtqKUIXPpu
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) October 18, 2026
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