बॉलीवुड अभिनेता राजकुमार राव की मच अवेटेड फिल्म प्रहार: द उज्ज्वल निकम स्टोरी अब सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। मशहूर सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के जीवन और 1993 मुंबई बम धमाकों से लेकर 26/11 के आतंकी हमलों तक की कानूनी लड़ाई को पर्दे पर दिखाने वाली इस फिल्म को लेकर दर्शकों और क्रिटिक्स की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
राजकुमार राव का दम, कहानी में थोड़ा बम कम? फिल्म में राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम के किरदार को पूरी शिद्दत से निभाया है। सोशल मीडिया पर उनकी एक्टिंग की जमकर तारीफ हो रही है। हालांकि, कई दर्शकों का मानना है कि अभिनय के स्तर पर फिल्म बहुत ऊपर है, लेकिन इसकी पटकथा (स्क्रीनप्ले) उस गहराई तक नहीं पहुंच पाई जिसकी उम्मीद इस विषय से थी। कुछ लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण फिल्म है, तो कुछ इसे निराश करने वाली बता रहे हैं।
अविनाश अरुण का निर्देशन और रोंगटे खड़े कर देने वाले सीन निर्देशक अविनाश अरुण ने इस 2 घंटे 20 मिनट के कोर्टरूम ड्रामा को काफी संजीदगी से पेश किया है। फिल्म का सबसे प्रभावशाली हिस्सा सीएसटी स्टेशन पर 26/11 के हमले का रीक्रिएशन है, जिसे देखकर दर्शक सहम जाते हैं। कोर्ट रूम के अंदर कसाब को नाबालिग साबित करने की कोशिश और उस पर निकम की तीखी बहस वाले दृश्यों को दर्शकों ने फिल्म का हाई पॉइंट बताया है।
ललित प्रभाकर का खौफनाक अभिनय अजमल कसाब की भूमिका में मराठी अभिनेता ललित प्रभाकर ने चौंका दिया है। कसाब के किरदार में उनकी शांति और क्रूरता को जिस तरह से उन्होंने पर्दे पर उतारा है, दर्शक उसकी सराहना कर रहे हैं। इनके अलावा वामिका गब्बी, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और आशीष विद्यार्थी जैसे मंझे हुए कलाकारों ने फिल्म की गंभीरता को बढ़ाने में अपना पूरा योगदान दिया है।
बैकग्राउंड म्यूजिक और स्क्रीनप्ले की चुनौती फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कोर्ट रूम के तनाव को बखूबी महसूस कराता है। हालांकि, फिल्म के साथ सबसे बड़ी चुनौती इसकी गति और लिखावट को लेकर है। कुछ क्रिटिक्स का कहना है कि गंभीर विषय होने के बावजूद पटकथा कहीं-कहीं भटकती हुई नजर आती है, जिससे कहानी की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
निष्कर्ष: क्या आपको फिल्म देखनी चाहिए? प्रहार उन लोगों के लिए एक जरूरी फिल्म हो सकती है जो कोर्ट रूम ड्रामा और सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्में पसंद करते हैं। जहां एक्टिंग के मोर्चे पर यह फिल्म बाजी मार ले जाती है, वहीं कहानी के स्तर पर यह कुछ दर्शकों को थोड़ी बोरिंग लग सकती है। यदि आप राजकुमार राव और एक मजबूत विषय के प्रशंसक हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।
Prahaar Review | Rajkummar Rao Brilliant, But Film Disappoints!
— Amit Bhatia (@amitbhatia1509) October 15, 2026
Rajkummar Rao gives a powerful performance in Prahaar, but the film around him struggles to match his intensity and ultimately feels underwhelming.
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