सत्ता परिवर्तन जनता का बुनियादी हक वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मुखर रुख अपनाया है। दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि देश में सत्ता परिवर्तन निश्चित रूप से होना चाहिए। उन्होंने इसे लोकतंत्र में जनता का बुनियादी संवैधानिक अधिकार करार दिया।
बीजेपी पर दोहरे मापदंड का आरोप भूषण ने सत्ताधारी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि आज जो लोग सरकार बदलने की मांग को साजिश बता रहे हैं, वे भूल गए हैं कि कभी वे खुद भी विपक्ष में रहकर सत्ता उखाड़ फेंकने के लिए बड़े आंदोलन करते थे। उन्होंने बीजेपी के रवैये को दोहरा मापदंड करार दिया।
आलोचना करना अपराध नहीं सुप्रीम कोर्ट के राजद्रोह कानून पर रुख का हवाला देते हुए भूषण ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई हिंसा न भड़काए या सार्वजनिक व्यवस्था न बिगाड़े, तब तक सरकार की आलोचना करना अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि असंतोष व्यक्त करना संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक अधिकार है।
आंदोलन और कड़ी सुरक्षा पर सवाल यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ दिल्ली में लगाई गई कड़ी सुरक्षा पाबंदियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रशासन की सख्त कार्रवाई की निंदा की है।
साफ है रुख प्रशांत भूषण का मानना है कि वर्तमान गतिविधियां सीधे तौर पर रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) की लड़ाई हैं। उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि सरकार बदलने की चाहत रखना न तो गैर-कानूनी है और न ही इसमें कुछ गलत है।
Delhi: Advocate Prashant Bhushan says, There will definitely be a regime change. We all want a regime change. Is there anything wrong with that?... pic.twitter.com/vUDowEBAI8
— IANS (@ians_india) October 15, 2026
हां, हम सत्ता परिवर्तन चाहते हैं : प्रशांत भूषण ने सरकार को दी खुली चुनौती
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