न्यूयॉर्क में यूनुस के खिलाफ गूंजे नारे: क्या यह हसीना की वापसी की चाहत या शासन की विफलता का संकेत?
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न्यूयॉर्क: 12 अक्टूबर को न्यूयॉर्क के JFK एयरपोर्ट पर बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को जिस तीखे विरोध का सामना करना पड़ा, उसने बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। प्रवासियों ने उन पर आतंकवादी होने और हजारों लोगों की हत्या के आरोप लगाए। यह घटना केवल एक विरोध नहीं, बल्कि उस बढ़ते असंतोष का प्रतिबिंब है जो शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद बांग्लादेश में पनपा है।

उम्मीदें बनाम हकीकत 5 अगस्त 2024 को जब शेख हसीना के शासन का अंत हुआ, तो मोहम्मद यूनुस से देश को बड़ी उम्मीदें थीं। सुधार, लोकतंत्र और जवाबदेही के वादे किए गए थे। लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद, न तो राजनीतिक व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव आया और न ही लोगों का लोकतंत्र पर भरोसा लौटा है। प्रशासनिक शून्य, बढ़ती अराजकता और भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा ने सरकार की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया और कूटनीतिक आक्रामकता न्यूयॉर्क में हुई इस घटना पर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने इसे प्रतिबंधित अवामी लीग के समर्थकों की हरकत करार दिया और अमेरिकी एजेंसियों से कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह दर्शाता है कि यूनुस सरकार अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अवामी लीग के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने के लिए आक्रामक कूटनीति अपना रही है।

मानवाधिकारों पर उठते सवाल यूनुस सरकार के कार्यकाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टें भी चिंताजनक हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच की 2026 की रिपोर्ट बताती है कि सुधारों के नाम पर मनमानी गिरफ्तारियां जारी रहीं। अवामी लीग के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया, जबकि देश में कानून-व्यवस्था सुधारने में सरकार पूरी तरह विफल रही। विशेष रूप से अल्पसंख्यकों पर हुए हमले और उन पर लगाम न लगा पाना प्रशासन की सबसे बड़ी नाकामी साबित हुई।

आर्थिक मोर्चे पर फिसड्डी सरकार राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। IMF के आंकड़े गवाही देते हैं कि बांग्लादेश की विकास दर 5.8 प्रतिशत से गिरकर 3.7 प्रतिशत पर आ गई है। बढ़ती महंगाई और वित्तीय क्षेत्र की कमजोरी ने आम लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। युवाओं के लिए रोजगार का सृजन करने और निवेश का भरोसा कायम करने में यूनुस प्रशासन लगभग विफल रहा है।

भारत के साथ बिगड़ते कूटनीतिक संबंध यूनुस के कार्यकाल ने भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में भी खटास पैदा की है। मार्च 2025 में चीन यात्रा के दौरान यूनुस की भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर की गई टिप्पणी को दिल्ली ने रणनीतिक चुनौती के रूप में लिया। इसका तार्किक परिणाम ट्रांसशिपमेंट सुविधाओं के निलंबन के रूप में सामने आया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक दूरी और बढ़ गई।

निष्कर्ष: क्या हसीना युग की वापसी की आहट है? आज बांग्लादेश में एक बड़ा वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। न्यूयॉर्क में लगे नारे महज आरोप नहीं, बल्कि शासन की विफलता का चीखता हुआ सच हैं। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि जनता वापस हसीना के शासन की ओर देख रही है, लेकिन यह स्पष्ट है कि मोहम्मद यूनुस के सुधारों की गाड़ी पटरी से उतर चुकी है और जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है।

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