क्या फिर से पटरी पर लौटेंगे भारत-चीन संबंध? पीयूष गोयल के बयान से बढ़ी उम्मीदें
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भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि भारत चीन के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने और उन्हें फिर से पटरी पर लाने की दिशा में काम कर रहा है।

साझेदारी के लिए बराबरी की शर्त ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में बोलते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया के किसी भी देश के साथ काम करने और संयुक्त उद्यम (Joint Ventures) के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए उचित और बराबरी की शर्तें अनिवार्य हैं। उन्होंने आपसी विश्वास, निरंतरता और भू-राजनीतिक स्थिरता को इस प्रक्रिया में सबसे अहम बताया।

व्यापार घाटा भारत के लिए बड़ी चुनौती आंकड़े बताते हैं कि चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़कर 127.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, निर्यात में उछाल के बावजूद, चीन से होने वाला आयात तेजी से बढ़ा है, जिससे भारत का व्यापार घाटा 99.19 अरब डॉलर के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। यही कारण है कि भारत ने चीन से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को फिलहाल सख्त रखा है।

महामारी का सबक और आत्मनिर्भर भारत पीयूष गोयल ने भारत के आत्मनिर्भर होने के संकल्प के पीछे के कड़वे अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब पश्चिमी देशों ने भारत को वैक्सीन देने से इनकार कर दिया था, तब देश को आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की अहमियत समझ आई। उन्होंने कहा कि दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जरूरतें खुद पूरी करना ही अब देश की प्राथमिकता है।

सिंगापुर के साथ सेमीकंडक्टर पर बड़ा कदम इसी मंच पर सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री गान किम योंग ने भारत के साथ नई रणनीतिक साझेदारी का ऐलान किया। दोनों देश विशेष रूप से सेमीकंडक्टर उद्योग में एक-दूसरे का सहयोग बढ़ा रहे हैं। सिंगापुर भारतीय कार्यबल को कौशल विकास और प्रशिक्षण देने में मदद करेगा, ताकि आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भारत वैश्विक हब बन सके।

क्या बदलाव की शुरुआत है? पीयूष गोयल का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। हालांकि अभी यह तय होना बाकी है कि ये बातचीत किस अंतिम नतीजे तक पहुंचेगी, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर सुगबुगाहट यह दर्शाती है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं।

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