पाकिस्तान की दोस्ती और आर्मेनिया की ताकत: भारत के घातक हथियारों से सहमा अजरबैजान
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नई दिल्ली: दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है —यह कहावत आज के भू-राजनीतिक परिदृश्य में बिल्कुल सटीक बैठ रही है। जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर लगातार पाकिस्तान का साथ देकर भारत को आंखें दिखाने वाला अजरबैजान अब खुद मुश्किल में है। भारत द्वारा आर्मेनिया को बेचे गए घातक हथियार बाकू की रातों की नींद उड़ा रहे हैं।

भारत के हथियारों से बढ़ा तनाव हाल ही में अजरबैजान के राष्ट्रपति ने भारत द्वारा आर्मेनिया को हथियार निर्यात करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। बाकू का दावा है कि भारत के घातक हथियारों ने क्षेत्र में सैन्य संतुलन को बिगाड़ दिया है और इससे सुरक्षा के गंभीर खतरे उत्पन्न हो गए हैं। अजरबैजान के सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि भारत की ये आपूर्ति आने वाले समय में उनके लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकती है।

आर्मेनिया की बढ़ती सैन्य ताकत दशकों से नागोर्नो-काराबाख विवाद को लेकर आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच संघर्ष चल रहा है। 2020 के युद्ध में तुर्की की मदद मिलने के बाद अजरबैजान का पलड़ा भारी रहा था, लेकिन अब आर्मेनिया ने अपनी रणनीति बदल दी है। रूसी हथियारों पर निर्भर रहने वाला आर्मेनिया अब भारत से आधुनिक सैन्य उपकरण खरीदकर अजरबैजान की बराबरी करने की कोशिश में है।

ATAGS आर्टिलरी गन: अजरबैजान के लिए बुरा सपना अजरबैजान के डिफेंस एक्सपर्ट्स की चिंता का मुख्य कारण भारत की स्वदेशी ATAGS आर्टिलरी गन है। 155mm कैलिबर वाली यह गन अपनी मारक क्षमता और सटीक निशाने के लिए जानी जाती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आर्मेनियाई सेना ने इसे युद्धक्षेत्र में कुशलता से इस्तेमाल किया, तो यह अजरबैजान की रक्षा पंक्तियों को ध्वस्त करने की क्षमता रखती है।

कूटनीतिक जवाब का असर हकीकत यह है कि जम्मू-कश्मीर मसले पर अजरबैजान का पाकिस्तान प्रेम भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती बना हुआ था। इसके जवाब में भारत ने कूटनीतिक चाल चलते हुए आर्मेनिया के साथ रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ किया है। अजरबैजान के रक्षा विश्लेषक वुगर अब्बासॉव ने स्वीकार किया है कि भारतीय हथियारों का आर्मेनिया के शस्त्रागार में शामिल होना उनके लिए एक बड़ा झटका है।

अब देखना यह होगा कि क्या आर्मेनिया इन हथियारों के बूते अपनी खोई हुई जमीन और सैन्य वर्चस्व को फिर से हासिल कर पाएगा, या अजरबैजान अपनी रणनीति में कोई नया बदलाव करेगा। फिलहाल, बाकू की बौखलाहट यह बताने के लिए काफी है कि भारत का रक्षा निर्यात अब वैश्विक स्तर पर एक बड़ा रणनीतिक हथियार बन चुका है।

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