कॉकरोच जनता पार्टी के मुखिया की दिल्ली में एंट्री, समर्थकों की गिरफ्तारी पर बोले- क्या तिरंगा फहराना जुर्म है?
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नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो प्रमुख नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका, को जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रदर्शन के मामले में तिहाड़ जेल भेजे जाने के बाद राजनीति गरमा गई है। इसी बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके बुधवार को दिल्ली पहुंच गए हैं।

एयरपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दिल्ली पहुंचते ही अभिजीत दीपके ने मीडिया के सामने तीखा रुख अपनाया। उन्होंने अपने सहयोगियों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा, क्या इस देश में तिरंगा फहराना अपराध हो गया है? आशुतोष और सौरव को सिर्फ इसलिए जेल भेजा गया क्योंकि उन्होंने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराया था।

दीपके ने इस घटना की तुलना ब्रिटिश शासन से की। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी स्थिति आखिरी बार अंग्रेजों के दौर में देखी गई थी, जब स्वतंत्रता सेनानियों को तिरंगा फहराने पर जेल भेजा जाता था। एयरपोर्ट पर इस बयान के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने उन पर तंज कसते हुए कहा, भाई, देश को क्यों खराब कर रहे हो?

क्यों हुई जेल? जंतर-मंतर बना विवाद का कारण पुलिस के अनुसार, मंगलवार को सौरव दास, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे समेत 14 सदस्यों ने जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने निजी परिसर में घुसकर तिरंगा फहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की।

चूंकि जंतर-मंतर को हाल ही में प्रदर्शन स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है, इसलिए पुलिस ने इसे नियमों का उल्लंघन माना और सभी को हिरासत में ले लिया।

तिहाड़ जेल और जमानत का गणित बुधवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने के बाद, सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति बॉन्ड के उल्लंघन और अतिक्रमण के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। वहीं, इसी मामले में शामिल आजिंक्य शिंदे को पांच हजार के बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया।

गौर करने वाली बात यह है कि पिछले शनिवार को भी ये नेता हिरासत में लिए गए थे। तब उन्होंने एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरकर जमानत ली थी, लेकिन पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन करके उन्होंने शर्तों का उल्लंघन किया है।

अब क्या करेंगे अभिजीत दीपके? अभिजीत दीपके 10 अक्टूबर को पार्टी के प्रदर्शन के दौरान अपनी दादी के निधन के कारण महाराष्ट्र स्थित अपने पैतृक गांव चले गए थे। उस समय उन्होंने भी शांति बॉन्ड भरकर जमानत ली थी। अब अपने प्रमुख सहयोगियों के जेल जाने के बाद दीपके की वापसी ने दिल्ली की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी आगे की रणनीति क्या होती है।

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