भारत की विज़न 2045 : 20 साल आगे की सोच और सेमीकंडक्टर पर बड़ा दांव
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दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की भविष्यवादी रणनीति का खुलासा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब केवल वर्तमान की चुनौतियों को नहीं सुलझा रहा, बल्कि अगले दो दशकों की वैश्विक ज़रूरतों को ध्यान में रखकर कदम उठा रहा है।

20 साल आगे की प्लानिंग अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत सरकार एक व्यवस्थित फ्रेमवर्क पर काम कर रही है। इसमें 3-5 साल के शॉर्ट-टर्म, 5-15 साल के मिड-टर्म और 20-25 साल के लॉन्ग-टर्म लक्ष्य शामिल हैं। मंत्री के अनुसार, भू-राजनीति (Geopolitics) तेज़ी से बदलती है, इसलिए भारत अपनी नीतियों को लगातार अपडेट कर रहा है ताकि किसी अन्य देश की नीतियों से भारत की उत्पादन क्षमता (Production Economy) प्रभावित न हो।

ग्लोबल वैल्यू चेन में भरोसा ही अब नई मुद्रा तकनीकी क्षेत्र में अब सिर्फ लागत (Cost) मायने नहीं रखती, बल्कि ट्रस्ट (भरोसा) सबसे अहम हो गया है। साइबर सुरक्षा के इस दौर में भारत खुद को एक विश्वसनीय पार्टनर के रूप में पेश कर रहा है। वैष्णव ने कहा, हम डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं, जिस पर दुनिया आंख मूंदकर भरोसा कर सके।

सेमीकंडक्टर और मटीरियल पर विशेष फोकस सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत अब लिगेसी नोड्स से आगे बढ़कर हाई-टेक प्रोडक्शन की ओर देख रहा है। सरकार अपने सेमीकॉन प्रोग्राम के दूसरे चरण में मटीरियल साइंस पर विशेष ज़ोर दे रही है। इसके लिए चिप्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की प्रोसेसिंग से लेकर उसे स्टोर करने तक की पूरी क्षमता भारत में विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

40 साल का बेदाग रिकॉर्ड भारत की ताकत मंत्री ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों में भारत में मौजूद ग्लोबल कंपनियों के साथ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ है। यह ट्रैक रिकॉर्ड भारत की लोकतांत्रिक स्थिरता और कानूनी ढांचे की मज़बूती को दर्शाता है। यही कारण है कि वैश्विक कंपनियां अब भारत को एक सुरक्षित और भरोसेमंद निर्माण केंद्र (Manufacturing Hub) के रूप में देख रही हैं।

सिस्टमैटिक ग्रोथ का मॉडल भारत की रणनीति बॉटम-अप दृष्टिकोण पर आधारित है। सरकार फाइनल प्रोडक्ट से लेकर मॉड्यूल, कंपोनेंट और कैपिटल इक्विपमेंट तक—हर स्तर पर आत्मनिर्भरता हासिल कर रही है। यही व्यवस्थित तरीका डिफेंस और रेलवे जैसे अन्य बड़े क्षेत्रों में भी अपनाया जा रहा है, ताकि आने वाले 20 वर्षों में भारत वैश्विक सप्लाई चेन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।

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