जंतर-मंतर अब नो प्रोटेस्ट ज़ोन , फिर भी आशुतोष रांका की हुंकार: इस्तीफा यहीं होगा
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दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर अब आधिकारिक तौर पर धरना स्थल नहीं रहा। सरकार ने इसे प्रदर्शनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) इस फैसले को मानने को तैयार नहीं है। पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे।

धरना स्थल बदला, प्रदर्शन जारी गृह मंत्रालय की कमेटी की सिफारिशों के बाद अब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है। प्रदर्शनकारियों के लिए अब दिल्ली में तीन नई जगहें निर्धारित की गई हैं: रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड। सरकार के इस कदम को आंदोलन को सीमित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

दीवार फांदकर फहराया तिरंगा नई पाबंदियों के बावजूद, CJP के आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को जंतर-मंतर पहुंचे। प्रशासन द्वारा अनुमति न दिए जाने के बाद भी वे दीवार फांदकर अंदर दाखिल हुए और तिरंगा फहराया। हालांकि, पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रांका और उनके सहयोगियों को हिरासत में ले लिया।

जो उखाड़ना है उखाड़ लो हिरासत में लिए जाने के बाद आशुतोष रांका ने एक आक्रामक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, हम वादा पूरा करेंगे, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा जंतर-मंतर पर ही होगा। सरकार भले ही जगह को डीनोटिफाई कर दे, लेकिन हम झुकेंगे नहीं। आज 10 लोग आए हैं, कल 10 हजार आएंगे। रांका ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन खत्म नहीं होगा।

पुराना ट्रैक रिकॉर्ड: पहले भी झुकाई सरकार कॉकरोच जनता पार्टी का दावा है कि वे बड़े आंदोलनों को अंजाम तक पहुंचाने में सक्षम हैं। इससे पहले, नीट पेपर लीक मामले में CJP द्वारा किए गए 36 दिनों के लंबे प्रदर्शन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। उस सफल प्रदर्शन ने पार्टी कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया है, जिसके चलते वे अब ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े हुए हैं।

प्रशासन के सामने चुनौती जंतर-मंतर को प्रदर्शन-मुक्त घोषित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ सरकार शांति और व्यवस्था का हवाला देकर नई जगहों पर प्रदर्शन करने की अपील कर रही है, वहीं आशुतोष रांका जैसे कार्यकर्ता इस स्थान को ही अपना रणक्षेत्र मान रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस टकराव को कैसे संभालता है।

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