आपदा की मार से कराहती दुनिया: अनिश्चित भविष्य के बीच क्यों याद आ रहा है सेंडाई फ्रेमवर्क ?
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बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं और वैश्विक संकट आज पूरी दुनिया प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में है। नेपाल में भीषण बाढ़ ने जनजीवन को तहस-नहस कर दिया है, तो पनामा में आए शक्तिशाली भूकंप ने सरकार को आपातकाल घोषित करने पर मजबूर कर दिया है। हर साल आपदाएं लाखों लोगों को विस्थापित कर रही हैं और विकास की गति को थाम रही हैं।

डिजास्टर रिस्क रिडक्शन का महत्व संयुक्त राष्ट्र ने आपदा प्रबंधन और जोखिम कम करने की वैश्विक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 13 अक्टूबर का दिन अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के रूप में निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य केवल आपदाओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उनसे निपटने की तैयारी और जोखिमों को कम करने के उपायों पर ध्यान केंद्रित करना है।

सेंडाई फ्रेमवर्क: एक नई राह 2015 में जापान के सेंडाई में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के तीसरे विश्व सम्मेलन में सेंडाई फ्रेमवर्क को अपनाया गया। यह ऐतिहासिक समझौता इस बात पर जोर देता है कि आपदाओं का सबसे बुरा असर स्थानीय स्तर पर पड़ता है। यह फ्रेमवर्क प्राकृतिक, पर्यावरणीय, तकनीकी और जैविक खतरों के बीच तालमेल बैठाकर जोखिम को कम करने की रूपरेखा तैयार करता है।

सरकार और समुदाय की साझी जिम्मेदारी सेंडाई फ्रेमवर्क का स्पष्ट संदेश है कि आपदा जोखिम को कम करना केवल सरकार का काम नहीं है। हालांकि सरकार की भूमिका इसमें मुख्य होती है, लेकिन इसके लिए स्थानीय निकायों (ग्राम पंचायत, नगर पालिका), निजी क्षेत्र और नागरिक समाज की भागीदारी अनिवार्य है।

स्थानीय स्तर पर बचाव की तैयारी भारत जैसे देशों में स्थानीय प्रशासन आपदा प्रबंधन की पहली पंक्ति है। ग्राम पंचायतें और जिला परिषदें न केवल लोगों को आपदाओं के प्रति जागरूक करती हैं, बल्कि प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल के जरिए बचाव कार्य में भी अहम भूमिका निभाती हैं। आपदा के समय सुरक्षित ठिकाने और त्वरित मेडिकल राहत इन स्थानीय संस्थाओं की बदौलत ही सुलभ हो पाती है।

आंकड़े बताते हैं- अभी भी बड़ी चुनौती है बाकी संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं। जहां चेतावनी देने वाली प्रणालियों (Early Warning Systems) के विस्तार ने मौतों की संख्या को कम करने में सफलता पाई है, वहीं आर्थिक नुकसान और बुनियादी ढांचे के विनाश के आंकड़े अभी भी चिंताजनक हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता में हुई वृद्धि ने पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

निष्कर्ष आपदाओं से पूरी तरह बचना शायद संभव न हो, लेकिन सेंडाई फ्रेमवर्क के सिद्धांतों को अपनाकर और स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ाकर हम जान-माल के जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। समय की मांग है कि आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय, रोकथाम में निवेश को प्राथमिकता दी जाए।

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