कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका एक साल का पीस बॉन्ड भरकर रिहा हो गए हैं। रिहाई के साथ ही यह सवाल चर्चा में है कि क्या ये नेता दोबारा किसी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले सकते हैं?
क्या प्रदर्शन पर लगी है रोक? कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, पीस बॉन्ड भरने का मतलब यह कतई नहीं है कि व्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों पर पूरी तरह रोक लग गई है। कानून किसी नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने या अपनी बात रखने से नहीं रोकता। ऐसे में तकनीकी रूप से दीपके और उनके साथी भविष्य में किसी प्रोटेस्ट का हिस्सा बन सकते हैं।
फ्लाइट से उतरते ही हुई थी गिरफ्तारी शनिवार को जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया था। मुंबई से दिल्ली पहुंचे अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को विमान से उतरते ही हिरासत में ले लिया गया। जहां अन्य सात हजार प्रदर्शनकारियों को रात तक छोड़ दिया गया, वहीं इन तीनों प्रमुख नेताओं को पूरी रात कस्टडी में रखा गया।
कोर्ट की कड़ी शर्तें और रिहाई का आधार तीनों नेताओं को रविवार को दिल्ली कैंट की एसईएम (SEM) कोर्ट में पेश किया गया। सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने बताया कि अदालत ने उन्हें 50-50 हजार रुपये के श्योरिटी बॉन्ड और एक साल के पीस बॉन्ड पर रिहा किया है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि एक साल तक उन्हें किसी भी तरह की अशांति फैलाने या अव्यवस्था पैदा करने से बचना होगा।
क्या बॉन्ड टूटने पर हो सकती है जेल? भले ही प्रदर्शन में शामिल होने पर सीधी पाबंदी न हो, लेकिन इन नेताओं के लिए अब जोखिम बढ़ गया है। यदि किसी प्रदर्शन के दौरान शांति भंग होती है या बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो पुलिस के पास इन्हें तुरंत गिरफ्तार करने का मजबूत कानूनी आधार होगा।
क्यों एसईएम के सामने भरा गया बॉन्ड? दिल्ली में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू है। इस व्यवस्था के चलते कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसीपी (ACP) रैंक के अधिकारी को ही एसईएम की शक्तियां प्राप्त होती हैं। इसीलिए यह पूरी कानूनी प्रक्रिया पुलिस के सामने ही संपन्न हुई है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि रिहाई के बाद सीजेपी नेताओं का अगला कदम क्या होगा।
हमारा जबरन किडनैप किया गया था.
— Cockroaches of India (@CJP_for_India) October 11, 2026
: सौरभ दास pic.twitter.com/Pyw81ms4YQ
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