सुप्रीम कोर्ट ने देश की राजधानी में चल रहे प्रदर्शनों और उसके बाद प्रशासन द्वारा उठाए गए सख्त कदमों पर तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नहीं रोका जा सकता और इंटरनेट सेवाएं हर हाल में बहाल रहनी चाहिए।
क्या है कोर्ट का बड़ा आदेश? जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र सरकार को अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि बैरिकेड्स केवल वहीं लगाए जाएं जहां कानून-व्यवस्था को वास्तविक खतरा हो। बाकी सभी स्थानों से बैरिकेड हटाए जाएं ताकि आम नागरिकों को परेशानी न हो। साथ ही, मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को भी सुचारू रूप से चलाने का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली पुलिस और केंद्र को नोटिस अदालत ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि सरकार को अवमानना की कार्रवाई से क्यों न दंडित किया जाए? सुप्रीम कोर्ट ने करीब 7000 लोगों को कथित रूप से अवैध हिरासत में लेने पर भी नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
कपिल सिब्बल ने जताई राहत वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि धारा 163 का दायरा सीमित हो और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को सुरक्षित रखा जाए। सिब्बल ने कहा कि कोर्ट के इस निर्देश से नागरिकों का न्याय व्यवस्था में भरोसा बढ़ा है।
इंटरनेट और अभिव्यक्ति की आजादी कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में इंटरनेट सेवाओं को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, पत्रकारों को अपना काम करने में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को बल देता है और सरकार को मनमाने ढंग से नागरिकों की आवाजाही को नियंत्रित करने से रोकता है।
इस मामले की अगली सुनवाई अब मंगलवार को होगी, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
#BREAKING Supreme Court orders no illegal detention can take place of those peacefully gathering.
— Live Law (@LiveLawIndia) October 11, 2026
Court orders Metro & Rail Services to function normally, Internet facilities must remain undisturbed as per law and free movement of people and traffic be permitted.
Court also… pic.twitter.com/nd7g2bxZMh
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