राजनीति के वीवीआईपी बच्चे: हार्वर्ड से ऑक्सफोर्ड तक, विदेशों में क्यों है नेताओं के परिवारों का दबदबा?
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भारतीय राजनीति में अक्सर नेताओं के काम के साथ-साथ उनके परिवार और जीवनशैली की चर्चा होती है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि देश का भविष्य तय करने वाले इन नेताओं के बच्चे पढ़ाई के लिए किस संस्थान को चुनते हैं? चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश दिग्गज नेताओं के बच्चों की पहली पसंद भारत के बजाय अमेरिका और ब्रिटेन की टॉप यूनिवर्सिटीज रही हैं।

हार्वर्ड और येल की चमक नेताओं के बच्चों की शैक्षणिक लिस्ट पर नजर डालें तो इसमें दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों के नाम शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बेटे ध्रुव गोयल और बेटी राधिका गोयल दोनों ने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया ने अमेरिका की मशहूर येल यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है।

कानून और मैनेजमेंट में विदेशी डिग्री का जलवा राजनीति के गलियारों से इतर, इन बच्चों ने करियर के लिए विविध राहें चुनी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया से एलएलएम किया है। वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह ने ब्रिटेन की लीड्स यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बेटे आरान पायलट ने भी पेंसिलवेनिया के व्हॉर्टन बिजनेस स्कूल से एमबीए किया है।

विदेशों में शिक्षा पाने वाले अन्य चर्चित नाम:

क्या यह शिक्षा व्यवस्था पर सवाल है? यह सूची दर्शाती है कि हार्वर्ड, येल, ऑक्सफोर्ड और कॉर्नेल जैसे नाम भारतीय राजनीतिक घरानों के बच्चों की पहली पसंद बने हुए हैं। हालांकि, यह चर्चा का विषय है कि यदि ये दिग्गज नेता अपने बच्चों को भारत के ही केंद्रीय या राज्य स्तरीय संस्थानों में शिक्षित करते, तो शायद भारतीय शिक्षा प्रणाली को लेकर एक बड़ा संदेश जाता और व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें और अधिक बलवती होतीं।

इन नेताओं के बच्चे पढ़ाई के लिए भले ही सात समंदर पार गए हों, लेकिन वे अपनी मेहनत और अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने के लिए चर्चा में रहते हैं। राजनीति में परिवार का नाम कितना भी बड़ा क्यों न हो, उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि यह साबित करती है कि उन्होंने अपनी योग्यता को निखारने के लिए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों का रुख करना जरूरी समझा।

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