उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच शुरू हुई जुबानी जंग ने राज्य में एक नए चुनावी विमर्श को जन्म दे दिया है।
अखिलेश की चुनौती और योगी का ओपन ऑफर अयोध्या में सपा प्रत्याशी पवन पांडेय के समर्थन में पहुंचे अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधे चुनौती दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सीएम इतने ही आश्वस्त हैं, तो वे खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर अपनी ताकत दिखाएं। अखिलेश की इस चुनौती का जवाब देने में योगी आदित्यनाथ ने भी देरी नहीं की। बलरामपुर में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने पलटवार करते हुए कहा, मैं आपको ऑफर देता हूं। आइए, आप भी अयोध्या धाम से नामांकन कीजिए और मैं भी करता हूं।
सियासी केंद्र क्यों बनी अयोध्या? अयोध्या केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि यूपी की राजनीति की दिशा तय करने वाला लिटमस टेस्ट है। 1990 के राम मंदिर आंदोलन के बाद से ही यहां की राजनीति पूरे प्रदेश को प्रभावित करती रही है। मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल से लेकर वर्तमान तक, अयोध्या की हर सियासी चाल उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों को बदलने की क्षमता रखती है।
भाजपा का मजबूत गढ़ और जमीनी समीकरण आंकड़ों पर नजर डालें तो अयोध्या में भाजपा का पलड़ा भारी रहा है। 1991 में भाजपा की पहली सरकार बनने के बाद से ही इस सीट पर पार्टी ने अपनी गहरी पैठ बनाई है। हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 में सपा ने फैजाबाद सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों में भाजपा यहाँ अब भी आगे रही है। गौरतलब है कि सपा प्रत्याशी पवन पांडेय पिछले दो विधानसभा चुनावों में भाजपा के वेद प्रकाश गुप्ता से हार चुके हैं।
संत समाज की एंट्री इस बयानबाजी के बीच अयोध्या के साधु-संत भी सक्रिय हो गए हैं। करतलिया भजनाश्रम के महंत रामदास त्यागी का मानना है कि चुनौती सपा के स्थानीय प्रत्याशी और सीएम के बीच थी, जिसे अब नई दिशा मिल गई है। वहीं, तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने योगी के स्टैंड का समर्थन करते हुए कहा कि अगर सपा को मुकाबला करना है, तो अखिलेश को खुद मैदान में आना चाहिए।
क्या होगा आगे? भले ही दोनों नेताओं ने अभी आधिकारिक तौर पर अयोध्या से चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके बयानों ने चुनाव से पहले ही माहौल गरमा दिया है। यदि वाकई दोनों दिग्गज अयोध्या से आमने-सामने होते हैं, तो यह उत्तर प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी लड़ाई कहलाएगी। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह जुबानी जंग महज राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहती है या फिर आगामी चुनाव में एक बड़ी हाई-प्रोफाइल फाइट में बदल जाती है।
*अगर बड़े बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री इतना ही आश्वस्त हैं तो खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं।
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) October 8, 2026
• माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, अयोध्या pic.twitter.com/xovkSEhz7F
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