पाकिस्तान में ईशनिंदा का खूनी तांडव : घर-फार्मेसी फूंकी, जान बचाकर भागे 35 ईसाई परिवार
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लाहौर: पाकिस्तान के शेखूपुरा जिले में ईशनिंदा के एक कथित मामले ने सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया है। घरियाल कलां गांव में एक ईसाई व्यक्ति पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री साझा करने का आरोप लगा, जिसके बाद भड़की भीड़ ने न केवल उसके घर और फार्मेसी को आग के हवाले कर दिया, बल्कि पूरे ईसाई समुदाय को दहशत में डाल दिया।

मस्जिद से हुआ भीड़ जुटने का ऐलान आरोपी की पहचान 40 वर्षीय कामरान गुल मसीह के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारी जुबैर अब्बास ने बताया कि मसीह पर फेसबुक पर ईशनिंदा से जुड़ी सामग्री साझा करने का आरोप है। तनाव तब और बढ़ गया जब एक स्थानीय मस्जिद से लोगों को एकजुट होने की घोषणा की गई। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिसने मसीह के घर और उसकी फार्मेसी को आग लगा दी।

डर के साए में 35 परिवार हिंसा की खबर फैलते ही इलाके में रहने वाले ईसाई समुदाय के 35 से अधिक परिवारों ने अपनी जान बचाने के लिए अपने घर छोड़ दिए। पुलिस ने दावा किया है कि कामरान गुल मसीह को हिरासत में लेकर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, ताकि उसे भीड़ के गुस्से से बचाया जा सके। उस पर पाकिस्तान दंड संहिता की गंभीर धारा 295-C के तहत मामला दर्ज किया गया है।

फेसबुक वीडियो से शुरू हुआ विवाद प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, विवाद की जड़ एक फेसबुक वीडियो है, जिसे कथित तौर पर जॉन शाकी नाम के एक यूजर ने अपलोड किया था। पुलिस ने इस वीडियो को अपने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए सील कर दिया है। पुलिस का कहना है कि वे डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं।

आगजनी करने वालों पर भी मामला दर्ज मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लिया है। पुलिस ने मसीह के खिलाफ दर्ज केस के अलावा, भीड़ द्वारा की गई हिंसा के लिए भी एक अलग FIR दर्ज की है। इसमें 5 लोगों को नामजद किया गया है और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ तोड़फोड़ और आगजनी की धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।

असुरक्षा के घेरे में अल्पसंख्यक पाकिस्तान में ईशनिंदा का मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है। यहां अक्सर अदालती सुनवाई से पहले ही भीड़ खुद जज और जल्लाद की भूमिका निभाने लगती है। इससे पहले 2021 में सियालकोट में एक श्रीलंकाई नागरिक की ईशनिंदा के शक में भीड़ द्वारा निर्मम हत्या ने पूरे विश्व को झकझोर दिया था। ताजा घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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