पुलिस की घेराबंदी धरी रह गई, जंतर-मंतर पर कैसे पहुंचे भारतीय अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज?
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दिल्ली: राजधानी के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान एक चेहरा सबसे अधिक चर्चा का विषय बना रहा—वह थे अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज। दिल्ली पुलिस की कड़ी सुरक्षा और नाकाबंदी के बावजूद उनका वहां पहुंचना कई लोगों के लिए हैरानी भरा था।

पुलिस की सख्ती और हिरासत का दौर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रशासन ने इसे मंजूरी नहीं दी थी। स्थिति यह थी कि प्रदर्शन से पहले ही पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को तो दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतरते ही हिरासत में ले लिया गया।

कौन हैं ज्यां द्रेज? अक्सर लोग ज्यां द्रेज को विदेशी समझ लेते हैं, लेकिन वे भारतीय नागरिक हैं। बेल्जियम में जन्मे ज्यां द्रेज ने 2002 में भारतीय नागरिकता अपना ली थी और अपनी मूल नागरिकता छोड़ दी थी। वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और रांची विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुके हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के साथ मिलकर उन्होंने गरीबी, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा पर व्यापक शोध कार्य किया है।

ग्रामीण रोजगार के आर्किटेक्ट ज्यां द्रेज को भारत की मनरेगा (ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के शुरुआती खाके को तैयार करने वाले प्रमुख विशेषज्ञों में गिना जाता है। वे केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) के सदस्य भी रहे हैं। उनका पूरा जीवन भारत के हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों और उनकी लड़ाई के लिए समर्पित रहा है।

क्यों पहुंचे जंतर-मंतर? जंतर-मंतर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए द्रेज ने कहा कि वे उन सभी लोगों की ओर से वहां आए हैं, जो पुलिस की असाधारण और अनुपातहीन तैनाती के कारण वहां तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने पुलिस की भारी घेराबंदी पर सवाल उठाते हुए इसे एक शक्ति प्रदर्शन करार दिया, जिसका उद्देश्य शांतिपूर्ण विरोध को दबाना है।

चुनावी जवाबदेही पर बड़ा हमला द्रेज ने प्रदर्शन स्थल से सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रशासन का डर इस बात से है कि कहीं लोग मतदाता सूची (SIR) और अपने वोट के अधिकार को लेकर एकजुट न हो जाएं। उनकी मौजूदगी ने CJP के इस छोटे आंदोलन को सामाजिक अधिकारों और चुनावी जवाबदेही के एक बड़े मंच में तब्दील कर दिया।

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