कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह? BJP नेता की बेटी जिसे दिल्ली पुलिस ने किया डिटेन
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान पूर्व बीजेपी विधायक की बेटी यशस्विनी राजे सिंह का नाम चर्चा में आ गया है। उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया है, जिसके बाद से सोशल मीडिया पर उनके बारे में चर्चा तेज हो गई है।

बंगला साहिब के पास पार्क में बैठने पर हिरासत

रिपोर्टों के अनुसार, यशस्विनी को बंगला साहिब के पास एक पार्क में शांतिपूर्वक बैठने के कारण पुलिस ने हिरासत में लिया। उन्हें केशव पुरम पुलिस स्टेशन ले जाया गया। यशस्विनी ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना की जानकारी देते हुए अपनी हिरासत की पुष्टि की है।

चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

यह घटना ऐसे समय में हुई जब CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही थी। इस प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। भारी तैनाती के बीच, सीजेपी के संयोजक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास सहित 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

यशस्विनी राजे सिंह एक कंटेंट क्रिएटर हैं। वह उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सदर से बीजेपी के पूर्व विधायक विक्रम सिंह की बेटी हैं। हालांकि वह एक राजनीतिक पृष्ठभूमि से आती हैं, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया और कंटेंट क्रिएशन के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वह युवाओं से जुड़े मुद्दों पर मुखर होकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं।

छात्र आंदोलन से जुड़ी रही हैं यशस्विनी

यशस्विनी पहली बार सुर्खियों में तब आईं जब उन्होंने जून-जुलाई 2026 में NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन का समर्थन किया था। उस दौरान प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। एक इंटरव्यू में यशस्विनी ने कहा था कि CJP ने सोशल मीडिया और मीम्स के जरिए ऐसे युवाओं को भी राजनीतिक चर्चाओं से जोड़ा, जो पहले इससे दूर रहते थे।

पिता के विपरीत स्वतंत्र राजनीतिक विचार

यशस्विनी के पिता विक्रम सिंह भाजपा के पूर्व विधायक रह चुके हैं, लेकिन यशस्विनी का कहना है कि वह अपने पिता के साथ राजनीति पर कोई चर्चा नहीं करतीं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी अपनी स्वतंत्र राय है और वह पिता के राजनीतिक प्रभाव से अलग अपनी पहचान बनाए रखना चाहती हैं।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और तत्कालीन राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी तीखी टिप्पणियों के कारण वह अक्सर दक्षिणपंथी और वामपंथी विमर्श के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं।

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