नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए रूस से डीजल खरीदने का ऐलान किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बातचीत के बाद, अमेरिका ने रूसी डीजल पर लगी पाबंदियों में 7 अप्रैल 2027 तक अस्थायी छूट दे दी है। यह फैसला तब आया है, जब अतीत में अमेरिका खुद भारत जैसे देशों पर रूसी तेल न खरीदने का भारी दबाव बनाता रहा है।
ट्रंप और पुतिन के बीच डील की शर्तें ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर जानकारी दी कि रूस तुरंत प्रभाव से वैश्विक बाजार में 3 लाख टन डीजल की आपूर्ति करेगा। नवंबर में यह मात्रा बढ़कर 5 लाख और फिर 10 लाख टन तक पहुंच जाएगी। ट्रंप का मानना है कि रूसी रिफाइनरियों की क्षमता को देखते हुए भविष्य में 30 लाख टन तक अतिरिक्त डीजल मिलने की संभावना है। हालांकि, रूस ने अभी आधिकारिक तौर पर समयसीमा पर मुहर नहीं लगाई है।
अमेरिकी नीति में यू-टर्न यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने रूसी ऊर्जा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे थे। लेकिन अब वित्त विभाग ने एक विशेष लाइसेंस जारी कर रूसी डीजल आयात को वैध कर दिया है। जानकारों का कहना है कि यह अमेरिका की उस कूटनीति का अंत है जहां वह दूसरों को रूस से ऊर्जा खरीदने के लिए दंडित करता था, लेकिन अब अपनी ही घरेलू जरूरतों के आगे उसने अपने रुख में नरमी बरतनी शुरू कर दी है।
ईरान युद्ध और तेल के मोर्चे पर संकट इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति का बाधित होना है। इससे अमेरिका में डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। चूंकि अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं, इसलिए बढ़ती ईंधन कीमतें ट्रंप प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गई हैं। डीजल महंगा होने से खेती, ट्रांसपोर्ट और आम जनजीवन का खर्च बढ़ गया है, जिसे कम करने के लिए ट्रंप ने रूस का रुख किया है।
आम जनता को कितनी मिलेगी राहत? क्या रूसी डीजल से आम अमेरिकी को सस्ता ईंधन मिलेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यह थोड़ा मुश्किल है। रूस से मिलने वाली आपूर्ति अमेरिका की कुल जरूरत की तुलना में बेहद कम है। बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में कोई बड़ी गिरावट आने की संभावना कम है। यह कदम केवल तात्कालिक दबाव कम करने की कोशिश मात्र हो सकता है।
कूटनीतिक गलियारों में हलचल इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों का तर्क है कि इससे रूस को आर्थिक मजबूती मिलेगी, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन युद्ध में कर सकता है। वहीं, ट्रंप का यह कदम दिखाता है कि राष्ट्रीय हित के सामने अमेरिका अपनी पुरानी कूटनीतिक नसीहतों को दरकिनार करने में भी पीछे नहीं हटता। अब देखना यह होगा कि क्या इस फैसले से अमेरिकी उपभोक्ताओं को वाकई राहत मिलती है या यह केवल राजनीतिक दांव बनकर रह जाता है।
US President Donald Trump posts on Truth Social: I have just concluded a highly successful discussion with President Vladimir Putin of Russia, wherein it was agreed that Russia will immediately supply over 300,000 Tons of Diesel Fuel to the American and Global Marketplace,… pic.twitter.com/Lx5BycU3Fz
— ANI (@ANI) October 9, 2026
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