नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में सख्ती बरतने के बाद भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह ढह गया है। आइए जानते हैं इस खबर की सच्चाई क्या है और आंकड़ों का क्या कहना है।
अमेरिकी राजनीतिक टिप्पणीकार बेनी जॉनसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा आठ प्रमुख आईटी कंपनियों (जैसे TCS, Infosys, Wipro, HCL) के लिए PERM (Permanent Labor Certification) प्रक्रिया पर रोक लगाने के बाद भारतीय बाजार क्रैश हो गया। इस पोस्ट के साथ अमेरिकी अधिकारी एंथनी डी एस्पोसिटो की Ruh roh वाली टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया, जिसे लोगों ने एक तंज के रूप में लिया।
वायरल दावे की सबसे बड़ी खामी इसका टाइमिंग है। अमेरिकी सरकार ने PERM प्रक्रिया पर रोक की घोषणा बाजार बंद होने के बाद की थी। जब यह घोषणा हुई, तब भारतीय बाजार का कारोबार पहले ही समाप्त हो चुका था। ऐसे में, उस दिन बाजार में जो भी गिरावट दिखी, उसे इस फैसले का परिणाम बताना तकनीकी रूप से पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
8 अक्टूबर को भारतीय बाजार में जो बिकवाली देखी गई, उसके पीछे पूरी तरह अलग कारण थे। विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से बिकवाली और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भारतीय बाजार में कमजोरी के मुख्य कारक थे।
9 अक्टूबर को बाजार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 292 अंक और निफ्टी 84 अंक ऊपर चढ़े। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि TCS ने अपने दूसरी तिमाही के नतीजों में 15 फीसदी की बढ़त दर्ज की, जिससे आईटी शेयरों में फिर से जान आ गई। इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसे शेयरों में भी मजबूती देखी गई।
अमेरिकी वीजा नीतियों में बदलाव का भारतीय आईटी सेक्टर पर असर जरूर पड़ता है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले क्रैश जैसे दावों में अक्सर अतिशयोक्ति होती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी भ्रामक पोस्ट के बजाय बाजार के वास्तविक आंकड़ों, कंपनी के फंडामेंटल्स और आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें।
निष्कर्ष: बाजार में उठा-पटक सामान्य है, लेकिन उसे हर बार किसी एक विदेशी नीति से जोड़कर देखना निवेश की गलत रणनीति हो सकती है।
The Indian stock market completely COLLAPSED today after the Trump Administration suspended H-1B and foreign labor programs over fraud.
— Benny Johnson (@bennyjohnson) October 8, 2026
The largest IT outsourcing firms in the world, Cognizant, Infosys, Tata, Wipro, HCL and Capgemini were removed from the Permanent Labor… pic.twitter.com/bosb40gBkP
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