नियामकीय प्रक्रिया पर विवाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने को लेकर स्टारलिंक और सरकार के बीच तनातनी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया था कि भारत सरकार स्टारलिंक को अनुमति देने में अड़चनें पैदा कर रही है। इस पर संचार मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि देश की लाइसेंसिंग व्यवस्था पूरी तरह निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है।
सरकार का स्पष्टीकरण: नियम सबके लिए एक मंत्रालय ने साफ किया कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए सभी कंपनियों पर समान नियम लागू हैं। सरकार ने अब तक तीन ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) प्रदाताओं को लाइसेंस दिए हैं। सभी कंपनियों की सुरक्षा जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही कंपनियां स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए आवेदन कर सकेंगी। मंत्रालय ने मस्क के दावों को निराधार और गलतफहमी पर आधारित बताया।
मस्क का पलटवार: ओलिगार्क्स पर निशाना स्पेसएक्स प्रमुख एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सरकार के रुख को चुनौती दी। मस्क ने आरोप लगाया कि भारत में कुछ ओलिगार्क्स (अति-धनवान उद्योगपति) अपने एकाधिकार को बचाने के लिए स्टारलिंक को बाजार में आने से रोक रहे हैं। मस्क का तर्क है कि यह रुकावट भारत के आम लोगों के डिजिटल भविष्य और हितों के खिलाफ है।
ग्रामीण भारत के लिए इंटरनेट का दावा विवाद के मूल में ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी है। आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट घनत्व शहरी क्षेत्रों की तुलना में काफी कम (48.31%) है। सोशल मीडिया पर उठे इस मुद्दे का तर्क है कि स्टारलिंक उन दूरदराज के पर्वतीय और द्वीपीय इलाकों में इंटरनेट पहुँचा सकता है, जहाँ फाइबर केबल बिछाना नामुमकिन है।
तैयारियों का दावा और सुरक्षा का मुद्दा स्टारलिंक की उपाध्यक्ष लॉरेन ड्रेयर ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में बताया कि कंपनी ने भारत में 20 गेटवे साइट्स तैयार कर ली हैं। कंपनी का दावा है कि उन्होंने भारतीय सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए डेटा को देश के भीतर ही रखने की व्यवस्था की है। ड्रेयर के अनुसार, कंपनी पिछले पांच वर्षों से भारतीय नियामकों के साथ संपर्क में है और प्रधानमंत्री के 100% कनेक्टिविटी के लक्ष्य में योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
भविष्य की राह फिलहाल, स्टारलिंक और सरकार के बीच यह जंग सुरक्षा ऑडिट और लाइसेंसिंग प्रक्रिया के इर्द-गिर्द घूम रही है। जहां सरकार का जोर डेटा सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने पर है, वहीं मस्क इसे बाजार में प्रतिस्पर्धा रोकने की कोशिश बता रहे हैं। अब देखना यह है कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद क्या स्टारलिंक को भारत में हरी झंडी मिलती है या यह विवाद और गहराता है।
A post is being circulated in social media regarding the fairness of India’s regulatory framework for satellite communication services and suggesting that it is being applied in a discriminatory manner. The Government has put in place a fair and non-discriminatory authorisation… https://t.co/UKwN8z9zkq pic.twitter.com/NB2bIbje5S
— ANI (@ANI) October 8, 2026
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