INDI गठबंधन की लंच डिप्लोमेसी पर सियासी घमासान: अखिलेश यादव ने दी सफाई
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नई दिल्ली: बुधवार को दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक और उसके बाद हुए प्रदर्शन के बीच लंच डिप्लोमेसी चर्चा का केंद्र बन गई है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा बुलाई गई इस मीटिंग में INDI गठबंधन के कई बड़े नेता शामिल हुए, लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों की अनुपस्थिति ने गठबंधन में दरार की अफवाहों को जन्म दे दिया।

अखिलेश यादव ने किया दावों का खंडन सपा सांसदों के लंच में न पहुंचने पर उठ रहे सवालों के बीच पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा, कोई एक लंच थोड़ी ही होगा। आने वाले समय में आपको सुनने को मिलेगा कि चाय पर बुलाया गया है। हम सब बैठकर समोसा भी खा सकते हैं। अगर कोई समोसे वाला नारा लग जाए, तो इसमें क्या खराबी है? डिप्लोमेसी चलती रहेगी।

जंतर-मंतर पर सियासी ड्रामा लंच के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर कूच किया। वहां भारी सुरक्षाबलों की तैनाती के बीच सियासी गहमागहमी बढ़ गई। पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें बाद में देर रात रिहा कर दिया गया। इस घटना के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र का काला दिवस करार देते हुए 8 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।

भाजपा का तीखा प्रहार विपक्ष के इस प्रदर्शन पर भाजपा ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, कांग्रेस की फर्स्ट फैमिली का दिल्ली की सड़कों पर किया गया प्रदर्शन बेहद निंदनीय है। इनका संविधान से कोई लेना-देना नहीं है, ये केवल अराजकता फैलाना चाहते हैं।

त्रिवेदी ने आगे कहा कि दिमागी नक्सल बन चुकी कांग्रेस जनमत खो चुकी है और अब केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए अराजकता का रास्ता चुन रही है। यह संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि उनका पारिवारिक घमंड है।

बढ़ती तल्खी और भविष्य की राजनीति एक तरफ INDI गठबंधन आपसी समन्वय के दावे कर रहा है, तो दूसरी तरफ सपा का लंच से दूर रहना और भाजपा का तीखा हमला यह दर्शाता है कि आने वाले दिनों में सियासी पारा और ऊपर जाने वाला है। दिल्ली की सड़कों पर हुआ यह प्रदर्शन महज एक शुरुआत है या गठबंधन के भीतर की सुगबुगाहट, यह आने वाला समय ही तय करेगा।

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