एक अणु के दो चेहरे, लेकिन प्रकृति को पसंद है सिर्फ एक: केमिस्ट्री के नोबेल से सुलझी जीवन की गुत्थी
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रसायन विज्ञान (Chemistry) के साल 2026 के नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया गया है। इस वर्ष का प्रतिष्ठित सम्मान वैज्ञानिकों हेनरी कागन (Henri B. Kagan) और केन्सो सोआई (Kenso Soai) को संयुक्त रूप से दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार असममित कार्बनिक संश्लेषण में नॉन-लीनियर इफेक्ट्स और ऑटो-कैटालिसिस की खोज के लिए मिला है।

क्या है होमोकायरैलिटी का रहस्य?

जीवन की केमिस्ट्री को वैज्ञानिक होमोकायरल (Homochiral) कहते हैं। यह शब्द ग्रीक भाषा के समान और हाथ शब्दों से मिलकर बना है। जिस तरह हमारे दोनों हाथ एक-दूसरे के मिरर-इमेज (दर्पण प्रतिबिंब) होते हैं, लेकिन पूरी तरह एक जैसे नहीं होते, ठीक वैसे ही अमीनो एसिड भी दो मिरर-इमेज रूपों में मौजूद होते हैं।

अजीब बात यह है कि हमारे शरीर की कोशिकाओं में मौजूद प्रोटीन में सिर्फ एक ही रूप पाया जाता है। दूसरा रूप प्रकृति में न के बराबर है। यह रहस्य वैज्ञानिकों को दशकों से परेशान कर रहा था।

टेस्ट ट्यूब की चुनौती और समाधान

लंबे समय तक रसायनज्ञों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि किसी केमिकल रिएक्शन में सिर्फ एक ही मिरर-इमेज वाला अणु कैसे बनाया जाए। प्रयोगों के दौरान अक्सर टेस्ट ट्यूब में दोनों मिरर-इमेज की बराबर मात्रा बन जाती थी, जिसे अलग करना बेहद कठिन और खर्चीला था।

दवाइयों के निर्माण में यह चुनौती और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि अक्सर शरीर पर असर दिखाने वाला सिर्फ एक ही रूप होता है। हेनरी कागन और केन्सो सोआई की खोजों ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि होमोकायरैलिटी कैसे पैदा की जा सकती है। उनकी इस उपलब्धि ने नई और प्रभावी दवाइयों को विकसित करने का रास्ता आसान बना दिया है।

केमिस्ट्री के नोबेल का गौरवशाली इतिहास

अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में स्थापित यह पुरस्कार 1901 से दिया जा रहा है। अब तक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में कुल 117 बार नोबेल पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं। इस पुरस्कार के इतिहास में सबसे कम उम्र के विजेता 35 वर्ष के रहे हैं, जबकि सबसे उम्रदराज विजेता 97 वर्ष के थे।

पिछले वर्ष यह सम्मान उन वैज्ञानिकों को दिया गया था जिन्होंने ऐसी आणविक संरचनाएं विकसित की थीं, जो बड़ी मात्रा में गैसों को सोख सकती हैं। इस तकनीक का उपयोग भविष्य में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने और रेगिस्तानी इलाकों में हवा से पानी इकट्ठा करने के लिए किया जा रहा है।

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