पाकिस्तान की जमीन पर यूएन चीफ का बड़ा प्रहार, कश्मीर राग अलापने वाले पत्रकार की बोलती बंद
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संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के पाकिस्तान दौरे के दौरान इस्लामाबाद को एक बड़ा राजनयिक झटका लगा है। हमेशा की तरह कश्मीर का मुद्दा उठाकर अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे एक पाकिस्तानी पत्रकार को यूएन चीफ ने ऐसा जवाब दिया कि वहां सन्नाटा पसर गया।

पत्रकार के सवाल पर यूएन चीफ का कड़ा रुख प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने आक्रामक लहजे में पूछा कि जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पुराने प्रस्ताव दशकों बाद भी लागू क्यों नहीं किए गए?

इसके जवाब में गुटेरेस ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि UNSC आज की दुनिया का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद की वैधता और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका ढांचा 1945 के दौर का है, जो 21वीं सदी की भू-राजनीति के अनुकूल नहीं है।

पाकिस्तान का पुराना कार्ड हुआ बेकार राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि गुटेरेस का यह बयान पाकिस्तान के लिए एक करारा तमाचा है। पाकिस्तान लगातार 1948-49 के प्रस्तावों का हवाला देकर भारत को घेरने की कोशिश करता है।

यूएन प्रमुख ने यह संकेत देकर कि UNSC खुद अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है, पाकिस्तान के उन दावों की हवा निकाल दी है जो इन पुरानी फाइलों पर आधारित हैं। यह भारत के उस स्टैंड को अप्रत्यक्ष समर्थन है, जिसमें भारत लगातार यूएन में व्यापक सुधार की मांग करता रहा है।

तीसरे पक्ष की भूमिका को दोहराया इनकार यूएन सचिवालय ने एक बार फिर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह से भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस मुद्दे का समाधान केवल शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत सीधी बातचीत से ही संभव है। भारत शुरू से ही इस बात पर कायम है कि कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इसमें किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या मध्यस्थता की कोई जगह नहीं है।

UNSC की गिरती साख का असर जानकारों का कहना है कि सुरक्षा परिषद की अपनी साख इन दिनों न्यूनतम स्तर पर है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या मध्य-पूर्व का संकट, इन वैश्विक मुद्दों पर UNSC मूकदर्शक बनी हुई है।

ऐसे में पाकिस्तान जिस संस्था के दम पर कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठा है, उसकी खुद की विश्वसनीयता वैश्विक स्तर पर सवालों के घेरे में है। गुटेरेस का यह बयान न केवल पाकिस्तान के लिए एक कड़वा सच है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों का स्पष्ट संकेत भी है।

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