सिर्फ EV ही नहीं, प्रदूषण कम करने के लिए मल्टी-पावरट्रेन मॉडल जरूरी: TVS चेयरमैन
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भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, TVS Motor के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण कम करने के लिए केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही एकमात्र समाधान नहीं हैं।

तकनीक के चुनाव में लचीलापन जरूरी

5 अक्टूबर को आयोजित IFQM सिम्पोजियम में श्रीनिवासन ने कहा कि ऑटो इंडस्ट्री को किसी एक तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय टेक्नोलॉजी-अग्नोस्टिक (जो किसी एक तकनीक का पक्ष न ले) दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

उनके मुताबिक, हमें किसी एक पावरट्रेन से बंधने के बजाय पर्यावरण पर पड़ने वाले कुल असर, गुणवत्ता और लागत को ध्यान में रखकर निर्णय लेने चाहिए।

EV को बढ़ना चाहिए, लेकिन ग्राहकों की मर्जी सर्वोपरि

श्रीनिवासन ने यह स्पष्ट किया है कि वे इलेक्ट्रिक वाहनों के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत में EV को स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने देना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाजार पर केवल EV थोपने के बजाय, ग्राहकों की जरूरतों और पसंद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वाहनों के चयन में गति और विकल्प सीमित नहीं होने चाहिए।

इथेनॉल ब्लेंडिंग का समर्थन

प्रदूषण कम करने और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए श्रीनिवासन ने पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) की वकालत की है।

उन्होंने कहा कि इथेनॉल के इस्तेमाल से प्रदर्शन में बहुत मामूली गिरावट आती है, जिसे नजरअंदाज किया जा सकता है। उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पूरा देश इथेनॉल पर चल रहा है, ऐसे में भारत को भी इस दिशा में पीछे नहीं हटना चाहिए।

गुणवत्ता की संस्कृति का विस्तार

सिम्पोजियम के दौरान उन्होंने भारतीय उद्योग जगत में वैश्विक स्तर की गुणवत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र के बाहर अन्य उपभोक्ता उत्पादों और सेवाओं में अभी भी क्वालिटी कल्चर की कमी है।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस गुणवत्ता संस्कृति को सप्लायर चेन के तीसरे स्तर (ग्राउंड लेवल) तक ले जाना आवश्यक है, ताकि लागत और गुणवत्ता के बोझ को कम किया जा सके।

भारत के लिए बहु-आयामी भविष्य

श्रीनिवासन का संदेश साफ है: भारत जैसे विशाल और विविध बाजार में एक ही समाधान सबके लिए (one-size-fits-all) वाला नजरिया काम नहीं करेगा।

भविष्य में प्रदूषण कम करने के लिए EV के साथ-साथ इथेनॉल और अन्य कम-उत्सर्जन वाली तकनीकों का संतुलित उपयोग ही सबसे प्रभावी रास्ता साबित हो सकता है। अंततः, कीमत, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपभोक्ता की मांग ही तय करेगी कि कौन सी तकनीक का भविष्य सबसे उज्ज्वल है।

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