अमेरिका और ईरान के बीच पिछले सात महीनों से जारी तनाव के बीच शांति वार्ता की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए तेहरान के सामने एक स्पष्ट और ठोस शर्त रख दी है।
परमाणु संवर्धन पर अमेरिका की कड़ी शर्त वेंस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका अब केवल जुबानी वादों पर भरोसा नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि युद्ध विराम या किसी भी समझौते के लिए ईरान को अपनी परमाणु संवर्धन क्षमता में सार्थक और ठोस कमी करनी होगी। वेंस ने सवाल उठाया कि यदि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, तो उसे 60 फीसदी तक संवर्धित ईंधन की आवश्यकता क्यों है?
शब्दों के बजाय ठोस कदम उपराष्ट्रपति ने दो टूक शब्दों में कहा, हम वादों को कार्यों से बदलने नहीं जा रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि ईरान को अपनी अत्यधिक संवर्धित ईंधन उत्पादन प्रक्रिया को पूरी तरह बंद करना होगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा हो सके कि तेहरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है।
ट्रंप की चेतावनी और चुनावी दबाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान के सुलह प्रस्तावों को खारिज कर चुके हैं। आने वाले मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर ट्रंप प्रशासन पर गहराते ऊर्जा संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों का भारी दबाव है। इसे देखते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने रुख नहीं बदला, तो अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और आक्रामक हो सकती है।
ईरान में असली सत्ता पर संशय वेंस ने बातचीत के दौरान एक बड़ा कूटनीतिक सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान की सरकार में फैसले लेने की वास्तविक शक्ति किसके पास है। वे राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराकची की प्रशासनिक क्षमता पर संदेह जता रहे हैं।
तेहरान का पलटवार वेंस के दावों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी भली-भांति जानते हैं कि ईरान में निर्णय कैसे लिए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के विरोधाभासी बयान ही शांति प्रक्रिया में भ्रम और अड़चनें पैदा कर रहे हैं।
फिलहाल, दोनों देशों के बीच शर्तें और बयानबाजी का दौर जारी है, लेकिन ठोस कूटनीतिक समाधान अभी भी कोसों दूर नजर आता है।
US Vice President JD Vance said Iran must make a meaningful reduction in its uranium enrichment capacity as part of any agreement to end the war with the US.
— Al Jazeera English (@AJEnglish) October 7, 2026
Vance added We’re not going to trade words for actions.
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