CEC विवाद: गृह मंत्रालय के संपर्क का दावा फर्जी, PIB ने दी चेतावनी
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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से संपर्क कर आकाशवाणी भवन पर चल रहे उनके धरने को खत्म करने की अपील की है।

इस खबर को पूरी तरह से नकारते हुए प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने इसे भ्रामक बताया है। PIB ने स्पष्ट किया है कि गृह मंत्रालय की ओर से ऐसी कोई पहल नहीं की गई है। उन्होंने आम जनता से आग्रह किया है कि वे केवल आधिकारिक और सत्यापित स्रोतों पर ही भरोसा करें।

क्या था वायरल दावा?

सोशल मीडिया पर चल रही पोस्ट में दावा किया गया था कि गृह मंत्रालय ने कांग्रेस नेताओं से बात की है और धरना समाप्त करने को कहा है। साथ ही यह भी कहा गया था कि कांग्रेस ने जवाब में स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उन्हें चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की अनुमति नहीं मिलती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

सेव डेमोक्रेसी और विरोध प्रदर्शन

दरअसल, विपक्षी दलों का गठबंधन INDIA ब्लॉक चुनाव आयोग के खिलाफ सेव डेमोक्रेसी अभियान चला रहा है। विपक्षी नेताओं का मुख्य मुद्दा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग उन्हें इस मामले पर सवाल पूछने का मौका नहीं दे रहा है।

विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने आकाशवाणी भवन के बाहर धरना शुरू कर दिया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कई युवा कांग्रेस और NSUI नेताओं को हिरासत में भी लिया।

राहुल गांधी के तीखे तेवर

राहुल गांधी ने इस विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को हाइजैक करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के करीब 300 सांसदों की बात अनसुनी की जा रही है और वे केवल चुनाव आयुक्तों से मिलकर अपने सवालों के जवाब चाहते हैं। राहुल ने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष चुनाव आयोग के पास नहीं जा सकता, तो वह देश में अपनी बात कहां रखे?

किरन रिजिजू का पलटवार

उधर, केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन को डेली ड्रामा करार दिया है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना न तो लोकतंत्र के लिए सही है और न ही इससे कांग्रेस को जनता का समर्थन हासिल होगा। रिजिजू ने विपक्षी दल को नसीबत दी कि वे संस्थाओं पर हमले करने के बजाय जनता की सेवा पर ध्यान केंद्रित करें।

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