बिहार का वाइट गोल्ड अब ग्रीस में: पूर्णिया के मखाने ने मारी अंतरराष्ट्रीय बाजार में एंट्री
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बिहार के पूर्णिया में पैदा होने वाला मखाना अब यूरोप के बाजारों में धूम मचा रहा है। राज्य में उत्पादित मखाने की पहली खेप ग्रीस पहुंच गई है, जो बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस महत्वपूर्ण व्यापारिक सफलता की जानकारी दी।

1 टन मखाने की पहली खेप पूर्णिया से 1 मीट्रिक टन मखाने की यह खेप कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से भेजी गई है। यह कदम बिहार के पारंपरिक मखाना किसानों को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए उठाया गया है, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

मुंद्रा पोर्ट से पिराएउस तक का सफर इस निर्यात प्रक्रिया में पूर्णिया के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट ने मखाने की आपूर्ति की। दिल्ली की एस.एस. फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने इसे निर्यात करवाया। यह खेप गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से होते हुए समुद्र के रास्ते ग्रीस के पिराएउस पोर्ट तक पहुंची।

घरेलू बाजार से मिली अधिक कमाई निर्यातकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मखाने की कीमत घरेलू बाजार की तुलना में काफी अधिक मिली है। यह साबित करता है कि मखाना उत्पादकों के लिए विदेशों में एक बड़ा और आकर्षक बाजार उपलब्ध है। बेहतर दाम मिलने से अब अधिक किसान इस व्यवसाय की ओर आकर्षित होंगे।

बिहार का दबदबा भारत दुनिया में मखाने का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी 80 से 85 प्रतिशत है। राज्य के करीब 10 जिलों में 35,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में मखाने की खेती की जाती है। बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर मखाना, दरभंगा जैसी संस्थाएं किसानों को निरंतर तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही हैं।

कृषि निर्यात में बढ़ती ताकत मखाना अब भारत के कृषि उत्पादों की लिस्ट में एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरा है। पूर्णिया से ग्रीस को हुआ यह निर्यात भविष्य में अन्य देशों के लिए भी रास्ते खोलेगा। इससे न केवल बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

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