क्रूड की सप्लाई में सुधार के बावजूद क्यों नहीं थम रही पेट्रोल-डीजल की महंगाई?
News Image

सप्लाई सुधरी, फिर भी दाम क्यों हैं ऊंचे? पश्चिम एशिया से क्रूड ऑयल की सप्लाई अब युद्ध-पूर्व के स्तर पर पहुंच गई है। जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स के एनालिस्टों के अनुसार, खाड़ी देशों से कच्चा तेल निर्यात सामान्य स्थिति में आ गया है। इसके बावजूद, वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर और भारतीय बास्केट 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। सवाल यह है कि जब कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ गई है, तो कीमतें नीचे क्यों नहीं आ रहीं?

रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कमी है बड़ी वजह भले ही कच्चे तेल (क्रूड) की सप्लाई बहाल हो गई हो, लेकिन डीजल, पेट्रोल और एटीएफ (ATF) जैसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति अभी भी सामान्य स्तर से काफी नीचे, करीब 60% पर है। कच्चे तेल के बाजार में सिर्फ सप्लाई ही नहीं, बल्कि ‘जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम’ भी जुड़ा होता है। होर्मुज स्ट्रेट के पास अभी भी तनाव का माहौल है, जिसके कारण शिपिंग रूट लंबे हो गए हैं और इंश्योरेंस व फ्रेट (भाड़ा) लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है।

भारत क्यों फंसा है महंगाई के चक्रव्यूह में? भारत के लिए यह एक दुष्चक्र बन गया है। महंगा क्रूड आयात करने से रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, और रुपये की कमजोरी के कारण क्रूड की खरीद और महंगी हो जाती है। इसके अलावा, भारतीय ऑयल कंपनियां घरेलू बाजार में डीजल और गैस बेचने पर भारी नुकसान उठा रही हैं। इसी घाटे की भरपाई के लिए कंपनियां डीजल का निर्यात कर रही हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट में मुनाफा कमाया जा सके।

रिफाइनर नुकसान से बचने की कोशिश में फिलहाल भारतीय कंपनियों को डीजल बेचने पर प्रति लीटर करीब 50 रुपये का नुकसान हो रहा है। यही कारण है कि मई 2026 के बाद से भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों (Retail prices) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंपनियां घरेलू बाजार में घाटे की भरपाई के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

क्या तेल की कीमतों में मिलेगी राहत? जानकारों का मानना है कि भारत में पेट्रोल-डीजल तभी सस्ता हो सकता है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड का दाम गिरकर 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ जाए। फिलहाल भारतीय रिफाइनर डीजल की वैश्विक कमी का लाभ उठाना चाहते हैं। हालांकि, आगामी चुनावी दौर को देखते हुए इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि सरकार तेल कंपनियों पर कीमतें कम करने का दबाव बना सकती है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

एशियाई खेलों की गोल्ड मेडलिस्ट बेटियों पर मेहरबान हिमाचल सरकार, मिलेगी 1-1 करोड़ की इनामी राशि

Story 1

विधायक जी का शाही बंगला और फायर ब्रिगेड की बौछार: सेवा या सत्ता का दुरुपयोग?

Story 1

काला सागर में दहला MV रोयाद मम्मादोव: रूसी ड्रोन हमले में 2 की मौत, 3 भारतीय नाविक जख्मी

Story 1

अजीत अगरकर की विदाई तय: BCCI ने नए चयनकर्ता के लिए मांगे आवेदन

Story 1

लखनऊ में बाढ़ का स्थायी समाधान : 40 किमी लंबा ग्रीन तटबंध बनाएंगे सीएम योगी, पीड़ितों को मिलेगा पक्का घर

Story 1

कैप्टन स्मित मच्छर का अदम्य साहस: अमेरिकी संसद ने भारतीय पायलट को दिया सबसे बड़ा सम्मान

Story 1

स्पर्म डोनर से शुरू हुआ रिश्ता, 4 बच्चों के बाद मस्क ने अचानक तोड़ा नाता: शिवॉन जिलिस का चौंकाने वाला खुलासा

Story 1

भारत-वेस्टइंडीज टी20: टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला, नमन धीर का डेब्यू और टीम इंडिया में बड़े बदलाव

Story 1

देशद्रोह हुआ है, कोई बच नहीं पाएगा : आकाशवाणी भवन के अंदर से राहुल गांधी का सीधा हमला

Story 1

बाढ़ में बेहाल जनता से दूरी, लंदन में अय्याशी के बाद सवालों से भागीं MLA मैथिली ठाकुर