उत्तर प्रदेश में दवाओं की लूट पर लगाम लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने बड़ा कदम उठाया है। अब अस्पताल की फार्मेसियों में मरीजों से दवाओं के नाम पर की जाने वाली मनमानी वसूली बंद होगी। 1 नवंबर 2026 से राज्य के सभी अस्पतालों में नई पारदर्शी व्यवस्था लागू होने जा रही है।
हाल ही में FSDA की जांच में स्वास्थ्य क्षेत्र का काला सच सामने आया था। विभाग ने 214 अस्पतालों की 130 दवाओं का विश्लेषण किया, जिसमें 36 दवाएं अपनी खरीद कीमत से 10 गुना से भी ज्यादा महंगी बेची जा रही थीं। एक मामले में तो हद ही हो गई— पॉलिमिक्सिन-बी इंजेक्शन मात्र 74.09 रुपये में खरीदा गया था, लेकिन उसे 4,980.94 रुपये की MRP पर बेचा जा रहा था।
अब अस्पतालों को अपनी एक पब्लिक वेबसाइट बनानी होगी। इस वेबसाइट पर दवा बनाने वाली कंपनी, ब्रांड का नाम, दवा की खरीद कीमत ( प्राइस टू रिटेल ) और मरीज को बेची जाने वाली कीमत ( प्राइस टू कंज्यूमर ) का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य होगा। सिर्फ दवा ही नहीं, बल्कि मेडिकल डिवाइस और न्यूट्रास्युटिकल्स पर भी यह नियम लागू होगा।
मरीजों को यह जानकारी खोजने के लिए मशक्कत नहीं करनी होगी। हर फार्मेसी काउंटर पर एक QR कोड लगाना अनिवार्य होगा। मरीज या उनके परिजन अपने मोबाइल से इस QR कोड को स्कैन करते ही दवाओं की खरीद और बिक्री की असली कीमत देख सकेंगे। इससे अस्पताल द्वारा वसूले जा रहे अतिरिक्त मुनाफे का खेल तुरंत पकड़ में आ जाएगा।
सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि पारदर्शिता और बढ़ाने के लिए वेबसाइट पर फार्मेसी का लाइसेंस नंबर, मालिक का विवरण, और वहां काम करने वाले फार्मासिस्ट का नाम, फोटो व पंजीकरण नंबर भी अपलोड करना होगा। साथ ही, फार्मेसियों को हर सप्ताह अपने स्टॉक की जानकारी भी अपडेट करनी होगी, ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं की उपलब्धता का पता पहले ही चल सके।
एक अन्य फैसले में सरकार ने थोक दवा विक्रय लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक को 11 अक्टूबर से हटाने का निर्णय लिया है। नवरात्रि और त्योहारों के दौरान दवाओं की आपूर्ति में कोई बाधा न आए, इसके लिए यह रियायत दी गई है।
FSDA की यह सख्त पहल मरीजों को आर्थिक शोषण से बचाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। नियम का पालन न करने वाली फार्मेसियों पर विभाग आने वाले समय में कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (UPFSDA) द्वारा की गई इस जांच में दवाओं की खरीद और एमआरपी (MRP) में भारी मुनाफे का यह खेल खुलकर सामने आया है।
— Saurabh Gupta (@Saurabh78344628) October 5, 2026
विभाग ने प्रदेशभर के 214 मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की फार्मेसियों से कुल 130 दवाओं के आंकड़े जुटाए थे। इनमें से 36… pic.twitter.com/z0plTXWsn1
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