ब्राजील के चुनाव पर ट्रंप का भूगोल बिगड़ा: भारत में करवा डाला राष्ट्रपति चुनाव, सोशल मीडिया पर उड़ गया मजाक
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डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार अपने किसी नीतिगत बयान की वजह से नहीं, बल्कि एक अजीबोगरीब गलती के कारण। अमेरिकी चुनावी प्रणाली की आलोचना करने के चक्कर में ट्रंप ने ब्राजील की जगह भारत में राष्ट्रपति चुनाव करवाने का दावा कर डाला।

ट्रंप की पोस्ट में क्या थी बड़ी गलती? ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, आज भारत (India) के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में 12.5 करोड़ लोगों ने वोट दिया और नतीजे उसी दिन आ गए। उन्होंने इसी बहाने अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और डेट्रॉइट, फिलाडेल्फिया और कैलिफोर्निया जैसे शहरों में वोटों की धीमी गिनती को धांधली करार दिया।

हकीकत यह है कि भारत में राष्ट्रपति का चुनाव जनता सीधे तौर पर नहीं करती है, बल्कि इसके लिए एक निर्वाचक मंडल होता है। ट्रंप की इस पोस्ट को व्हाइट हाउस के आधिकारिक रैपिड रिस्पॉन्स अकाउंट ने भी साझा किया, जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें भूगोल और प्रक्रिया के ज्ञान पर जमकर घेरा।

ब्राजील चुनाव पर थी नजर, पर चूक गए ट्रंप दरअसल, ट्रंप दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील में हो रहे राष्ट्रपति चुनाव पर टिप्पणी करना चाहते थे। वहां हाल ही में पहले दौर का मतदान संपन्न हुआ है। इस चुनाव में दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो, जो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं, मैदान में हैं।

98.81 प्रतिशत वोटों की गिनती के बाद फ्लावियो 47.24% वोटों के साथ लूला दा सिल्वा (44.91%) से आगे रहे। हालांकि, 50% से अधिक वोट न मिल पाने के कारण अब दोनों के बीच 25 अक्टूबर को अंतिम मुकाबला होगा।

दोस्तों के लिए ट्रंप की चिंता? डोनाल्ड ट्रंप और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बीच गहरी दोस्ती रही है। बोल्सोनारो वर्तमान में तख्तापलट की साजिश रचने के मामले में 27 साल की जेल काट रहे हैं, जिसकी ट्रंप ने कड़ी आलोचना की थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप का यह ट्वीट अपने दोस्त के बेटे फ्लावियो के प्रदर्शन से उत्साहित होकर जल्दबाजी में किया गया था, जिसमें उन्होंने देश का नाम ही बदल दिया।

अब देखना यह है कि ब्राजील के आगामी दौर में लूला दा सिल्वा दक्षिणपंथी चुनौती को कैसे रोकते हैं, क्योंकि उनके सामने अब उन वोटर्स को अपने पाले में लाने की बड़ी चुनौती है, जिन्होंने पहले दौर में अन्य उम्मीदवारों को वोट दिया था।

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