जीएसटी 2.0: व्यापार जगत के लिए खुशखबरी, इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियमों में होगा बड़ा बदलाव
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जीएसटी व्यवस्था को और अधिक सरल और उद्योग-अनुकूल बनाने के लिए मोदी सरकार जीएसटी 2.0 पर काम कर रही है। आगामी 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है, जिसका सीधा लाभ देश के लाखों व्यापारियों और कंपनियों को मिलेगा।

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के नियमों में ढील जीएसटी के शुरुआती वर्षों में लागू किए गए कड़े नियमों में अब बदलाव की तैयारी है। काउंसिल का मुख्य फोकस उन नियमों को आसान बनाने पर है जो वर्तमान में कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल को ब्लॉक कर रहे हैं। अब कागजी जांच-पड़ताल की जगह पूरी तरह से ऑटोमेटेड और रिस्क-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी।

धारा 17(5) के तहत बंद छूटें हो सकती हैं बहाल बैठक में धारा 17(5) की समीक्षा की जाएगी, जिससे कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रस्ताव के तहत कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, आउटडोर कैटरिंग, टेलीकॉम टावर, फैक्ट्रियों के बाहर पाइपलाइन और मुफ्त सैंपल जैसे मदों पर टैक्स क्रेडिट फिर से शुरू किया जा सकता है। इसके अलावा, 13 सीटों तक वाली गाड़ियों के रखरखाव और लीज पर भी आईटीसी मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।

सप्लायर की गलती पर खरीदार को नहीं मिलेगी सजा जीएसटी विवादों का सबसे बड़ा कारण सप्लायर द्वारा टैक्स जमा न करना रहा है, जिसका खामियाजा खरीदार को भुगतना पड़ता था। अब सरकार ऐसा फॉर्मूला ला रही है कि यदि सौदा पारदर्शी है, तो खरीदार का आईटीसी नहीं रोका जाएगा। टैक्स की रिकवरी सीधे उस सप्लायर से की जाएगी जिसने चोरी की है।

छोटे व्यापारियों को नोटिस से राहत छोटे कारोबारियों को छोटी-मोटी गलतियों के लिए मिलने वाले नोटिस से बड़ी राहत मिलेगी। 10 हजार रुपये से कम के टैक्स मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है। यह नियम पुराने लंबित मामलों पर भी प्रभावी होगा। इसके अलावा, 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले छोटे कारोबारियों को साल में सिर्फ एक बार रिटर्न भरने की सुविधा मिल सकती है।

आईटी सेक्टर को मिलेगा एक्सपोर्ट का दर्जा आईटी और आईटीईएस (ITES) कंपनियों के लिए भी यह बैठक अहम होगी। विदेशी ब्रांच ऑफिस को दी जाने वाली सेवाओं को एक्सपोर्ट का दर्जा दिया जा सकता है। इससे इन कंपनियों को भी आईटीसी का लाभ मिलेगा, जिससे उद्योग की कार्यक्षमता बढ़ेगी और फंसी हुई पूंजी का प्रवाह सुधरेगा।

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