तेहरान में युद्ध की तैयारी मध्य-पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। तेहरान में युद्ध की आहट के साथ ही आम नागरिक भी मोर्चे पर डट गए हैं। रविवार को तेहरान के इमाम हुसैन स्क्वायर स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने हथियारों का कड़ा प्रशिक्षण लिया।
चूड़ियों की जगह बंदूकें इन महिला प्रतिभागियों ने सैन्य अधिकारियों से रणनीतिक गुर सीखने के साथ-साथ हैंडगन और आधुनिक हथियारों को लोड करने और सटीक निशाना साधने का अभ्यास किया। हाथों में हथियारों की कमान थामे इन महिलाओं का संदेश स्पष्ट है—वे मातृभूमि की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती से टकराने को तैयार हैं।
परिवार की सुरक्षा का संकल्प यह प्रशिक्षण केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि नागरिकों की निजी सुरक्षा से भी जुड़ा है। 45 वर्षीय प्रतिभागी राहेलेह घादिरी ने कहा, युद्ध के समय अपने परिवार और पड़ोस की सुरक्षा करना सीखने से हमारा डर कम हो रहा है। ईरान द्वारा हाल ही में खोले गए सिविलियन मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर्स का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को किसी भी संभावित जमीनी हमले के लिए तैयार करना है।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का कड़ा तेवर यह सैन्य लामबंदी तब हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे ईरान के खिलाफ जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। व्हाइट हाउस से निकलते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया गया है और अब फैसला लेना है कि आगे का रास्ता कैसा होगा।
अरागची की दो टूक: जवाब होगा और भी कड़ा अमेरिकी धमकियों पर ईरान ने भी कड़े तेवर अपनाए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने स्पष्ट कर दिया है कि सैन्य ताकत या प्रतिबंधों से इस विवाद का समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दुश्मन ने सैन्य टकराव का रास्ता चुना, तो ईरान का जवाब पहले से कहीं अधिक कड़ा और शक्तिशाली होगा।
क्या आगे बढ़ने वाली है रार? एक ओर कूटनीतिक कोशिशें रुकी हुई हैं, तो दूसरी ओर सैन्य धमकियों का दौर जारी है। ईरान में आम लोगों को मिल रही सैन्य ट्रेनिंग यह संकेत दे रही है कि तेहरान किसी भी बड़े जमीनी हमले की संभावना को गंभीरता से ले रहा है। ऐसे में यह संघर्ष आने वाले दिनों में किस दिशा में मुड़ेगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
*Women in Tehran receive basic firearms and military training aimed at preparing them to defend their families and communities in the event of war pic.twitter.com/KhYFdfXCTI
— Reuters (@Reuters) October 5, 2026
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