GST 2.0: कारोबारियों को बड़ी राहत, अब टैक्स अफसर नहीं कर सकेंगे सीधे गिरफ्तारी, कोर्ट की मंजूरी अनिवार्य
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देश के करोड़ों कारोबारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार जीएसटी के ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव करने की तैयारी में है, जिससे व्यापारियों को टैक्स विभाग की मनमानी से बड़ी सुरक्षा मिलेगी।

अधिकारों पर लगाम, अब कोर्ट तय करेगा गिरफ्तारी GST 2.0 के तहत सरकार जीएसटी अधिकारियों की उन शक्तियों को सीमित करने जा रही है, जिसके तहत वे कमिश्नर की अनुमति से सीधे किसी को भी गिरफ्तार कर लेते थे। नए प्रस्ताव के मुताबिक, अब गिरफ्तारी के लिए टैक्स अफसरों को अदालत (Court) से मंजूरी लेनी अनिवार्य होगी।

आपराधिक मुकदमे की सीमा 1 करोड़ से बढ़कर 5 करोड़ होगी सरकार का मुख्य फोकस आपराधिक मुकदमों के दायरे को सीमित करना है। वर्तमान नियमों के तहत 1 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी पर आपराधिक केस दर्ज किया जा सकता है। अब इस सीमा को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि 5 करोड़ रुपये से कम के टैक्स विवादों में अब व्यापारियों को जेल नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि मामला सिर्फ जुर्माने और टैक्स रिकवरी तक सीमित रहेगा।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जोर अक्सर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और नियमों की अलग-अलग व्याख्या को लेकर व्यापारियों और अधिकारियों के बीच विवाद होता है। सरकार का मानना है कि तकनीकी गलतियों पर व्यापारियों को अपराधी घोषित करना व्यापार के माहौल को खराब करता है। अब सरकार छोटे और तकनीकी विवादों को आपराधिक श्रेणी से बाहर रखकर केवल आर्थिक दंड के जरिए सुलझाना चाहती है।

24 अपराधों की समीक्षा और सजा में कटौती जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में करीब 24 तरह के अपराधों की समीक्षा की जाएगी। प्रस्ताव है कि इनमें से 9 अपराधों को नियमों से पूरी तरह हटा दिया जाए। इसके अलावा, मध्यम श्रेणी के अपराधों में सजा की अवधि को 3 साल से घटाकर 2 साल करने पर भी विचार चल रहा है।

तकनीक से निगरानी, मनमानी पर रोक सरकार का मानना है कि जीएसटी का डिजिटल सिस्टम अब इतना पारदर्शी हो चुका है कि डेटा मिलान (Data Matching) के जरिए फर्जी बिल और टैक्स चोरी को आसानी से पकड़ा जा सकता है। इसलिए, अधिकारियों को सीधा अधिकार देने के बजाय डेटा-आधारित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

7 अक्टूबर की बैठक पर टिकी नजरें जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर को होने वाली अहम बैठक में इन प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लग सकती है। यदि यह बदलाव लागू होते हैं, तो यह भारतीय कर प्रणाली में सबसे बड़े सुधारों में से एक होगा, जो न केवल व्यापारियों का उत्पीड़न रोकेगा, बल्कि व्यापार करने की प्रक्रिया को और अधिक सरल व सुरक्षित बनाएगा।

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