दीदी के बिग बॉस शो का टिकट बुक करो : जंतर-मंतर पर बस रोकने के मॉडल पोज़ पर मचा बवाल
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है। इस वीडियो में एक युवती पुलिस की बस के सामने एक खास अंदाज में खड़ी होकर उसे रोकने की कोशिश करती नजर आ रही है। उसके इस स्टांस को देखकर इंटरनेट यूजर्स इसे विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि फोटोशूट करार दे रहे हैं।

वायरल वीडियो और लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @ojasbhandarii नाम के यूजर ने यह वीडियो शेयर किया है। वीडियो में दिख रहा है कि प्रदर्शन के दौरान युवती ने जिस तरह का पोज़ दिया, वह किसी फिल्म की शूटिंग जैसा लग रहा है। वीडियो शेयर करने वाले यूजर ने नाराजगी जताते हुए लिखा, अब हर व्यक्ति इस तरह के मॉडल पोज़ देकर वायरल होने की कोशिश कर रहा है। यह बहुत परेशान करने वाला है, कृपया इसे बंद करें।

बिग बॉस का टिकट पाने की होड़? वीडियो के वायरल होते ही कमेंट सेक्शन में मजाक और तीखी आलोचनाओं की बाढ़ आ गई। एक यूजर ने तंज कसा, दीदी के बिग बॉस शो का टिकट जल्दी बुक करो, लगता है इसे वहां जाना है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि आजकल प्रदर्शन इंस्टा स्टोरी बनाने और रातों-रात फेम पाने का जरिया बन गए हैं। लोगों का मानना है कि प्रदर्शनकारियों को अब मुद्दों से ज्यादा कैमरा एंगल की चिंता है।

क्या विरोध प्रदर्शन अब महज एक ड्रामा है? इस वायरल क्लिप ने एक गंभीर बहस छेड़ दी है। कई लोगों का तर्क है कि प्रदर्शनों की गंभीरता अब खत्म होती जा रही है और इसे रियलिटी टेलीविजन के ऑडिशन जैसा पेश किया जा रहा है। एक यूजर ने सुझाव दिया, अगर कुछ दिनों के लिए प्रदर्शन स्थलों पर इंस्टाग्राम बैन कर दिया जाए, तो ये सारे विरोध अपने आप खत्म हो जाएंगे क्योंकि इनका असली मकसद सिर्फ वायरल होना है।

2 अक्टूबर की घटना और हकीकत यह घटना 2 अक्टूबर की है जब जंतर-मंतर पर भारी पुलिस बल तैनात था और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा था। जहां कुछ लोग इसे पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ बहादुरी बता रहे हैं, वहीं बहुमत का मानना है कि यह सब सिर्फ मीडिया अटेंशन पाने के लिए किया गया एक स्टंट था।

प्रदर्शनों पर गहराता संकट यह वीडियो दर्शाता है कि डिजिटल युग में विरोध प्रदर्शनों के मायने बदल रहे हैं। सोशल मीडिया की पहुंच ने प्रदर्शनकारियों को एक मंच तो दिया है, लेकिन साथ ही क्लाउट चेजिंग (फेम पाने की होड़) ने असल मुद्दों को पीछे छोड़ दिया है। अब मांग उठ रही है कि प्रदर्शन स्थलों पर रील बनाने और फोटोग्राफी पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए ताकि विरोध का असली मकसद कहीं खो न जाए।

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