समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने गोरखपुर में हुई शर्मनाक घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। पार्टी कार्यालय में हुई हाथापाई के बाद सपा की पूरी जिला कार्यकारिणी और महानगर इकाई को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला? शनिवार को गोरखपुर स्थित समाजवादी पार्टी के कार्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इस दौरान पूर्व जिला अध्यक्ष नगीना साहनी और नेता अंशुमान सिंह के समर्थकों के बीच बैठने की जगह को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई।
देखते ही देखते यह विवाद हिंसक रूप ले लिया और दोनों गुटों के बीच जमकर लात-घूंसे चले। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्टी की छवि पर गहरा असर पड़ा।
नेताओं पर गिरी गाज इस अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत अखिलेश यादव ने गोरखपुर के जिला अध्यक्ष और शहर अध्यक्ष दोनों को उनके पदों से हटा दिया है। इतना ही नहीं, पार्टी की जिला और शहर इकाई के सभी पदाधिकारियों को भी उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है।
अखिलेश यादव ने केवल मुख्य इकाई ही नहीं, बल्कि सभी फ्रंटल संगठनों और सहयोगी विंग्स के पदाधिकारियों को भी पद से बर्खास्त कर दिया है।
2027 चुनाव से पहले सख्त संदेश यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब समाजवादी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है। गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है, ऐसे में वहां पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी ने नेतृत्व को सकते में डाल दिया था।
अनुशासनहीनता पर यह बड़ी कार्रवाई संदेश देती है कि पार्टी अब गुटबाजी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
सीट शेयरिंग पर भी निर्देश इस घटना से पहले, अखिलेश यादव ने अपने नेताओं को सार्वजनिक रूप से बयानबाजी न करने की हिदायत दी थी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सीट-शेयरिंग और कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर जो भी राय या चिंताएं हैं, उन्हें केवल पार्टी के आंतरिक मंच पर ही रखा जाए।
पार्टी के भीतर बढ़ती बयानबाजी और नेताओं के मनमुटाव को देखते हुए अखिलेश यादव का यह कदम डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है।
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) October 4, 2026*
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