एशियन गेम्स 2026: क्या कारतूस की कमी ने छीन लिए भारतीय निशानेबाजों के पदक?
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एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाजों का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। आइची-नागोया में टीम ने कुल 15 पदक जीते, जो 2023 के हांग्जो गेम्स (22 पदक) की तुलना में काफी कम हैं। इस गिरावट ने खेल जगत में एक बहस छेड़ दी है—क्या खराब प्रदर्शन का असली कारण कारतूस की कमी और उसकी गुणवत्ता थी?

सप्लाई में देरी और पुराने स्टॉक का संकट रिपोर्टों के अनुसार, मैच-ग्रेड .22 कैलिबर कारतूस की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी रही। दावा किया गया है कि कई निशानेबाजों को प्रतियोगिता से ठीक पहले पुराने स्टॉक से अभ्यास करने के लिए मजबूर होना पड़ा। शूटिंग जैसे सटीक खेल में, कारतूस का एक खास बैच और ब्रांड खिलाड़ी के प्रदर्शन पर सीधा असर डालता है।

आशी चौकसे का अनुभव और संघर्ष इस समस्या का सामना जुलाई 2026 में आशी चौकसे को भी करना पड़ा था। ISSF वर्ल्ड कप के दौरान, उन्हें अपने कारतूस में गड़बड़ी महसूस हुई, लेकिन विकल्प न होने के कारण उन्हें उसी पुराने स्टॉक (पेरिस ओलंपिक के समय का) के साथ आगे बढ़ना पड़ा। हालांकि, बाद में एशियन गेम्स में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए सिल्वर मेडल जीता, लेकिन यह घटना खिलाड़ियों के सामने आने वाली अनिश्चितताओं को उजागर करती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध का लॉजिस्टिक्स पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स और यूरोप से होने वाली गोला-बारूद की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत में भी मैच-ग्रेड कारतूस के लिए खिलाड़ियों को कई महीनों तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि, केवल सप्लाई को ही हार का एकमात्र कारण मानना जल्दबाजी होगी, क्योंकि पुराने कारतूस का प्रदर्शन उसके स्टोरेज और बैच पर भी निर्भर करता है।

क्या कहता है NRAI? नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने कारतूस की कमी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। संघ का स्पष्ट कहना है कि एशियन गेम्स के लिए जरूरी गोला-बारूद समय पर खिलाड़ियों तक पहुंचाया गया था और उन्होंने ट्रेनिंग के दौरान इनका परीक्षण भी किया था।

आंकड़ों पर एक नजर:

शूटिंग में एक छोटा सा तकनीकी बदलाव भी जीत और हार का अंतर तय कर सकता है। क्या भारत को भविष्य में ऐसी चुनौतियों से बचने के लिए गोला-बारूद के घरेलू उत्पादन या बेहतर इन्वेंट्री प्रबंधन पर अधिक ध्यान देना होगा? यह आने वाले समय में भारतीय निशानेबाजी का सबसे बड़ा सवाल होगा।

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