देश की ऐतिहासिक विरासत और ज्ञान का भंडार मानी जाने वाली सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी (CSL) पर खतरा मंडरा रहा है। सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के चलते इस लाइब्रेरी के अस्तित्व पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है।
सोमवार को होगी अहम सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सोमवार के लिए सुनवाई तय की है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करेगी। दरअसल, सेंट्रल विस्टा के तहत जिन सरकारी भवनों को हटाया जा रहा है, उनके लिए नई जगहें आवंटित कर दी गई हैं, लेकिन 135 साल पुरानी इस लाइब्रेरी के लिए अब तक कोई स्थान तय नहीं हुआ है।
8.5 लाख दुर्लभ किताबों का संग्रह यह लाइब्रेरी महज एक इमारत नहीं, बल्कि इतिहास का हिस्सा है। 1891 में इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के रूप में स्थापित इस संस्थान में 8.5 लाख से अधिक किताबें और महत्वपूर्ण दस्तावेज मौजूद हैं। 1969 से यह शास्त्री भवन में संचालित हो रही है और लगभग 5500 वर्ग मीटर के दायरे में फैली हुई है।
स्थान बदलने का लंबा इतिहास इस लाइब्रेरी का स्थानांतरण कोई नई बात नहीं है। 1911 में राजधानी दिल्ली शिफ्ट होने पर इसे पहले सिविल लाइंस में रखा गया था, जिसके बाद यह नॉर्थ ब्लॉक और फिर शास्त्री भवन तक पहुंची। अब जबकि शास्त्री भवन को सेंट्रल विस्टा प्लान के तहत गिराया जाना है, तो सवाल यह है कि इतनी बड़ी तादाद में किताबों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से कहां रखा जाएगा?
छात्रों और शोधकर्ताओं की बढ़ी चिंता सरकारी अधिकारियों के अलावा, बड़ी संख्या में छात्र इस लाइब्रेरी का उपयोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करते हैं। फिलहाल मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स और सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) जगह की तलाश में जुटे हैं, लेकिन अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं।
दूसरी ओर, देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार नई कानूनी मुश्किलों में घिरते दिख रहे हैं। केरल सरकार ने उनके खिलाफ 20 साल पुराना मामला फिर से खोलने के आदेश दिए हैं।
क्या है 2006 का मामला? यह मामला साल 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे। उन पर वोटर लिस्ट से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। विपक्षी दलों द्वारा लगातार विरोध और दबाव के बीच, राज्य सरकार ने इस पुराने केस की जांच को फिर से हरी झंडी दिखा दी है। चुनाव आयुक्त के पद पर रहते हुए यह कानूनी चुनौती उनके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।
Supreme Court takes suo motu cognisance of the proposed relocation of the 135-year-old Central Secretariat Library (CSL) in Delhi, which houses over 8.5 lakh books. The move comes amid concerns that the library has apparently found no place in the new Central Vista Plan.
— ANI (@ANI) October 4, 2026
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