रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से वैश्विक भू-राजनीति में भारत ने अपनी एक अलग और अडिग पहचान बनाई है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के साथ संबंधों को लेकर जो रुख अपनाया है, उसने अमेरिका से लेकर मिडिल ईस्ट तक के देशों को हैरान कर दिया है।
अमेरिकी धमकियों का भारत पर असर नहीं अमेरिकी कानून के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है। इसके बावजूद भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में जयशंकर ने स्पष्ट किया कि बाहरी दबाव के बावजूद नई दिल्ली मॉस्को के साथ अपने रणनीतिक संबंध बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
2% से 50% तक पहुंचा रूसी तेल का आयात यूक्रेन युद्ध से पहले भारतीय तेल बास्केट में रूस की हिस्सेदारी 2 फीसदी से भी कम थी, जो आज बढ़कर 50 फीसदी से अधिक हो गई है। बैठक में इस बात पर गौर किया गया कि युद्ध के कारण पश्चिम एशिया के पारंपरिक ऊर्जा सप्लायर्स पर असर पड़ा है, जिससे भारत के लिए रूस एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।
यूरोप का दोहरा मापदंड बैठक में यह तथ्य भी सामने रखा गया कि भारत को नसीहत देने वाले कई यूरोपीय देश खुद अभी भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर हैं और वहां से तेल का आयात कर रहे हैं। भारत का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना हर देश का संप्रभु अधिकार है।
कूटनीति और बातचीत ही एकमात्र रास्ता भारत का रुख शुरू से ही स्पष्ट रहा है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी नेतृत्व के साथ लगातार संवाद बनाए रखा है। भारत का मानना है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही इस संघर्ष को खत्म किया जा सकता है।
सांसदों के साथ हुई विस्तृत चर्चा इस बैठक में कांग्रेस, बीजेपी, टीएमसी और सीपीआई (एम) के प्रमुख सांसदों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ का भारत-रूस व्यापार पर संभावित असर था। विदेश मंत्री ने दोहराया कि भारत रूस के साथ व्यापार, निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में अपने बहुआयामी जुड़ाव को आगे भी जारी रखेगा।
Chaired a consultative committee meeting on India - Russia relations.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 3, 2026
Highlighted various aspects of our multifaceted engagement including in trade, investments, energy, connectivity, culture and P2P domains.
As well as our active support to dialogue & diplomacy to end the… pic.twitter.com/JrkHW12m6L
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