# H1: मिठाई के डिब्बे बनाने वाले की बेटी ने रचा इतिहास, दादी के 3000 रुपये से शुरू हुआ सफर अब सीधा ओलंपिक पर!
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अमरावती की 17 वर्षीय कुमकुम मोहोद ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास

महाराष्ट्र के अमरावती की रहने वाली 17 वर्षीय कुमकुम मोहोद ने 2026 एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में दक्षिण कोरिया की दिग्गज येजिन ओह को शूट-ऑफ में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ ही उन्होंने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का टिकट भी पक्का कर लिया है।

दादी के 3000 रुपये और संघर्ष की शुरुआत

कुमकुम का तीरंदाजी का सफर 9 साल की उम्र में शुरू हुआ था। उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे महंगा रिकर्व धनुष खरीद सकें। तब उनकी दादी ने उन्हें 3000 रुपये दिए, जिससे कुमकुम ने अपना पहला धनुष खरीदा। इसी छोटे से निवेश ने आज उन्हें विश्व स्तर का खिलाड़ी बना दिया है।

मिठाई के डिब्बों से ओलंपिक तक का रास्ता

कुमकुम के पिता अनिल मोहोद मिठाई की दुकानों के लिए गत्ते के डिब्बे बनाने का काम करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को कभी मरने नहीं दिया। उनकी माँ रूपाली मोहोद ने ही सबसे पहले कुमकुम की प्रतिभा को पहचाना था और उन्हें कोच प्रफुल्ल डांगे के पास ट्रेनिंग के लिए भेजा।

परीक्षा और खेल का संतुलन

एक समय कुमकुम के सामने सबसे बड़ी मुसीबत तब आई जब ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं के कारण उनका मराठी का पेपर छूट गया था। परिवार को लगा कि उनका साल बर्बाद हो जाएगा, लेकिन स्पोर्ट्स कोटे और प्रैक्टिकल अंकों की मदद से उन्होंने 72 फीसदी अंक हासिल किए और साबित किया कि वे पढ़ाई में भी पीछे नहीं हैं।

फाइनल में दिखाया गोल्डन संयम

एशियन गेम्स के फाइनल मुकाबले में कुमकुम एक समय दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी से पिछड़ रही थीं। लेकिन उन्होंने दबाव को हावी नहीं होने दिया। पांचवें सेट में उन्होंने परफेक्ट 30 का स्कोर बनाकर मैच को बराबर किया और अंततः शूट-ऑफ में परफेक्ट 10 मारकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।

टूर्नामेंट में रहा दबदबा

2026 एशियन गेम्स कुमकुम के लिए बेहद सफल रहे। उन्होंने न केवल व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीता, बल्कि महिला टीम इवेंट में भी स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके अलावा, मिश्रित रिकर्व टीम स्पर्धा में उन्होंने रजत पदक जीतकर टूर्नामेंट का समापन तीन पदकों के साथ किया। कुमकुम की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

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