मुंबई से क्यों शुरू हुआ CJP का जेल भरो आंदोलन ? अभिजीत दीपके ने बताया बड़ा कारण
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मुंबई: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना जेल भरो आंदोलन मुंबई के शिवाजी पार्क से शुरू कर दिया है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर पुलिस की अनुमति न मिलने के बावजूद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास समेत भारी संख्या में समर्थक सड़कों पर उतर आए।

दिग्गजों का मिला साथ इस प्रदर्शन में बॉलीवुड की जानी-मानी हस्तियों ने भी शिरकत की। अभिनेत्री शबाना आजमी ने मतदान को देशवासियों की सबसे बड़ी ताकत बताया और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का समर्थन किया। वहीं, फिल्म निर्माता और संगीतकार विशाल भारद्वाज ने भी मौके पर पहुंचकर कहा कि देश में जो गलत हो रहा है, उसके खिलाफ आवाज उठाना उनका निजी फैसला है।

दिल्ली के बजाय मुंबई को क्यों चुना? सवाल उठ रहे हैं कि पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन करने वाली सीजेपी ने इस बार मुंबई को केंद्र क्यों बनाया? इस पर अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के नतीजों में आया बड़ा अंतर ही इसका आधार है। दीपके ने कहा, दिल्ली की सत्ता की ताकत महाराष्ट्र से भी तय होती है।

लोकसभा बनाम विधानसभा: चुनावी आंकड़ों का गणित दीपके ने इन चुनावों के नतीजों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। लोकसभा चुनाव में महायुति को 17 सीटें मिली थीं, जबकि विपक्ष (MVA) के खाते में 30 सीटें गई थीं। लेकिन महज छह महीने बाद विधानसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई और महायुति को 288 में से 230 सीटें मिल गईं। दीपके का आरोप है कि इतने कम समय में जनादेश में आया यह भारी बदलाव संदेह पैदा करता है।

आंदोलन की आगे की रणनीति यह प्रदर्शन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा। दीपके ने बताया कि इसके बाद कोलकाता, बेंगलुरु और गोवा जैसे शहरों में विरोध प्रदर्शन होंगे। अंत में यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर समाप्त होगा। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। साथ ही, वे 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

मैं फिर आऊंगा शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर पुलिस ने कानूनी पाबंदियों का हवाला दिया था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की चेतावनी पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके ने फडणवीस के ही अंदाज में कहा, मैं फिर आऊंगा। 2 अक्टूबर की तारीख का चयन भी प्रतीकात्मक है, क्योंकि मुंबई का भारत छोड़ो आंदोलन के इतिहास से गहरा नाता रहा है। सीजेपी अब इसी तर्ज पर सरकार के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज करने की तैयारी में है।

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