बिहार में बाढ़ का तांडव: 6 जिलों में 2 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, 41 टीमें तैनात
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बिहार में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। गंगा और कोसी के बाद अब गंडक नदी की विकराल लहरों ने राज्य के कई जिलों में तबाही मचा दी है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, वैशाली और मुजफ्फरपुर के करीब 1200 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा से अब तक 2 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं।

टूटते तटबंध और बढ़ता पानी

गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के कारण तटबंधों पर अत्यधिक दबाव बन गया है। पिछले चार दिनों में 14 जगहों पर तटबंध या बांध टूटने की सूचना है। सारण के मकेर और गोपालगंज के बैकुंठपुर में तटबंध टूटने से पानी तेजी से रिहायशी इलाकों में फैल गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि कई जगहों पर मकान ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं।

युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य

संकट की इस घड़ी में राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत झोंक दी है। प्रभावित क्षेत्रों में NDRF की 14 और SDRF की 27 टीमें तैनात की गई हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में राहत सामग्री की पैकेजिंग की निगरानी की। उन्होंने निर्देश दिया कि भोजन, दवा, ओआरएस और पशु चारे जैसी जरूरी चीजें हर हाल में पीड़ितों तक पहुंचनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली जाएगी।

केवल गंडक ही नहीं, अन्य नदियों का भी खतरा

बिहार का बाढ़ संकट केवल गंडक तक सीमित नहीं है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और गंगा नदियां भी उफान पर हैं। मुजफ्फरपुर, वैशाली और पटना के कई इलाकों में नदियों का जलस्तर हाइएस्ट फ्लड लेवल (HFL) को पार कर गया है। राज्य प्रशासन के आला अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सभी जिलाधिकारियों को आपदा प्रबंधन के लिए अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मानवीय संकट: भोजन और छत की तलाश

बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे हजारों लोग अपना आशियाना छोड़कर ऊंचे स्थानों और बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं। आम जनमानस के सामने सबसे बड़ी चुनौती भोजन, शुद्ध पेयजल, दवाइयों और पशुओं के चारे की कमी है। प्रशासन का दावा है कि नावों के जरिए लोगों को निकाला जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति बेहद विकट है और उन्हें तत्काल सरकारी सहायता की आवश्यकता है।

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