यूपी कांग्रेस का नया चेहरा: क्या मोना मिश्रा थामेंगी कमान? 2027 के लिए यह है कांग्रेस का मास्टर प्लान
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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। चर्चाओं के केंद्र में हैं कांग्रेस विधानमंडल दल (CLP) की नेता और रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा मोना ।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को केंद्रीय स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी में है। उनकी जगह आराधना मिश्रा को यूपी कांग्रेस की कमान सौंपकर पार्टी एक नई दिशा देने की कोशिश कर रही है।

लोकतंत्र बचाओ मुहिम और मोना का तेवर

हाल ही में कांग्रेस ने राष्ट्रव्यापी लोकतंत्र बचाओ सप्ताह का आगाज किया है। आराधना मिश्रा ने इस अभियान के जरिए चुनाव आयोग और वोट कटने के मुद्दे पर सरकार को घेरा है।

उनका स्पष्ट कहना है कि वोट ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने इंडिया ब्लॉक के साथ मिलकर हर वोट की रक्षा करने की बात दोहराई है, जिससे यह साफ है कि आने वाले समय में वे आक्रामक विपक्ष की भूमिका में नजर आएंगी।

कौन हैं आराधना मोना मिश्रा?

आराधना मिश्रा यूपी की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं।

उन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत को बखूबी संभाला है। प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से वे तीन बार (2014 उपचुनाव, 2017 और 2022) लगातार विधायक चुनी गई हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से MBA करने वाली मोना अपनी कुशल संगठनात्मक क्षमता के लिए जानी जाती हैं।

कांग्रेस की रणनीति: ब्राह्मण और महिला वोट बैंक पर नजर

मोना मिश्रा को कमान सौंपकर कांग्रेस दो बड़े सियासी समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है:

  1. ब्राह्मण कार्ड: यूपी में ब्राह्मण मतदाता लगभग 10-12% हैं। कांग्रेस इस वर्ग को फिर से अपने पाले में लाकर अपनी खोई साख वापस पाना चाहती है।
  2. महिला शक्ति: प्रदेश में महिला मतदाताओं की संख्या 47% के करीब है। मोना को आगे कर पार्टी महिलाओं के बीच अपनी सीधी पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।

दलित-ओबीसी-मुस्लिम संतुलन की कवायद

कांग्रेस केवल एक चेहरे पर निर्भर नहीं रहना चाहती। पार्टी का लक्ष्य सोशल इंजीनियरिंग के जरिए सभी वर्गों को एकजुट करना है।

दलित मतदाताओं को साधने के लिए पहले ही राजेंद्र पाल गौतम को यूपी प्रभारी की जिम्मेदारी दी जा चुकी है। अब चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष के साथ एक ओबीसी और एक मुस्लिम कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जा सकते हैं। इस दलित-ब्राह्मण-ओबीसी-मुस्लिम समीकरण के साथ कांग्रेस 2027 के कड़े मुकाबले में उतरने की तैयारी कर रही है।

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